तन्खा से उपजा तनाव, CM कमलनाथ रूठे राज्यपाल को 1 घंटे तक मनाते रहे

भोपाल। महापौर एवं नगर पालिका अध्यक्ष के अप्रत्यक्ष चुनाव संबंधी अध्यादेश पर राज्यसभा सदस्य विवेक तन्खा के ट्वीट से राज्यपाल लालजी टंडन नाराज हो गए। हालात यह बने कि शाम को सीएम कमलनाथ राजभवन पहुंचे, 1 घंटे तक रूठे राज्यपाल को मनाते रहे, तब कहीं जाकर मामला कुछ शांत हुआ। अध्यादेश अभी भी लंबित है। 

अध्यादेश पर सोमवार को निर्णय होने वाला था

गौरतलब है कि अध्यादेश पर सोमवार को निर्णय होना था, लेकिन राज्यसभा सदस्य विवेक तन्खा का ट्वीट आने के बाद मामले में 'टि्वस्ट" आ गया और राज्यपाल के नाखुश होने की खबरें सामने आने लगीं। शाम को अचानक मुख्यमंत्री कमलनाथ के राजभवन पहुंचने की खबर आई, जहां उन्होंने लगभग एक घंटे तक रुककर राज्यपाल के सामने सरकार का पक्ष रखा।

राज्यपाल ने राज्यहित में निर्णय का भरोसा जताया है: मुख्यमंत्री

मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री ने बताया कि विवाद की कोई स्थिति नहीं हैं, उन्होंने राज्यहित में निर्णय का भरोसा जताया। उन्होंने तन्खा के ट्वीट को उनकी निजी राय बताया। उल्लेखनीय है कि तन्खा ने अपने ट्वीट के जरिए राजधर्म की नसीहत और अध्यादेश न रोकने की सलाह दी थी। इसके बाद राज्यपाल के नाखुश होने की खबर सामने आई, बताया जाता है कि राजभवन ने इसे दबाव की राजनीति माना। जबकि पूर्व में वह सरकार के साथ हुई चर्चा में आश्वस्त थे।

मुख्यमंत्री ने सरकार का पक्ष रखा है

जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा ने रात में पत्रकारों को मुख्यमंत्री की राज्यपाल के साथ हुई मुलाकात का ब्योरा दिया। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने राज्यपाल को नगरीय निकाय में महापौर के संबंध में विस्तृत जानकारी देकर अध्यादेश के बारे में सरकार का पक्ष रखा। मुख्यमंत्री ने भरोसा जताया कि राज्यपाल इस संबंध में राज्यहित में निर्णय लेंगे। शर्मा ने भाजपा द्वारा पार्षदों के खरीद-फरोख्त के आरोप पर पलटवार करते हुए कहा कि खरीद-फरोख्त कांग्रेस का चरित्र नहीं है। अप्रत्यक्ष प्रणाली से चुनाव नई बात नहीं है, अन्य राज्यों में ऐसी व्यवस्था है।

अब राज्यपाल के पास 3 विकल्प

हरियाणा व त्रिपुरा के पूर्व राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी ने इस मुद्दे पर कहा है कि राज्यपाल के पास तीन विकल्प हैं। कोई बिल आता है तो उस पर कारण गिनाते हुए स्पष्टीकरण मांग सकते हैं। राज्यपाल संतुष्ट नहीं तो वह अध्यादेश को अनिश्चित काल के लिए पेंडिंग रख सकते हैं अथवा सीधे राष्ट्रपति को भेजकर मार्गदर्शन मांग सकते हैं। पूर्व राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी ने महापौर का चुनाव सीधे जनता से होने को ज्यादा प्रजातांत्रिक बताया है।

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