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BHOPAL NEWS : बारिश ने बनाया नया रिकॉर्ड, चार और सिस्टम सक्रिय

भोपाल। प्रदेश में कई स्थानों पर रुक-रुक कर बरसात का सिलसिला जारी है। इसी क्रम में बुधवार सुबह 8:30 बजे तक मप्र में इस सीजन की 1204.1 मिमी. बरसात हो चुकी है। यह सामान्य (899.2मिमी.) के मुकाबले 34 फीसदी अधिक है। उधर राजधानी में बुधवार शाम 5:30 बजे तक इस सीजन की बरसात का आंकड़ा 1694.0 मिमी. तक जा पहुंचा।

इंद्र देवता इस बार राजधानी पर खासे मेहरबान हैं। यही वजह है कि बारिश के सीजन के अभी तक के कुल 110 दिनों में से 74 दिन तक बरसात हुई। जिसके चलते बुधवार शाम तक 1694.0 मिमी. बारिश रिकार्ड हुई,जो अभी तक का रिकार्ड वर्षा में शुमार हो गई है। हालांकि सितंबर माह में सबसे अधिक बरसात के मामले में थोड़ी कसर बाकी है। वर्ष 1999 में सितंबर माह में 461.0 मिमी. बरसात हुई थी।

मौसम विज्ञानियों के मुताबिक विभाग में अभी तक के उपलब्ध आंकड़ों में यह सर्वाधिक बरसात है। उधर प्रदेश में अभी भी चार मानसूनी सिस्टम सक्रिय हैं। इस वजह से प्रदेश में रुक-रुक कर बौछारें पड़ने का सिलसिला जारी रहेगा। भोपाल में भी बारिश का यही दौर बना रहेगा। मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक बुधवार सुबह 8:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक नौगांव में 35, जबलपुर में 34.5, रायसेन में 27, दमोह और खजुराहो में 16, खरगोन में 14, भोपाल(एयरपोर्ट) पर 11.9, भोपाल (शहर) 11.2, सतना में 11, पचमढ़ी में 5, बैतूल, उमरिया में 3 मिमी. बरसात हुई।

2006 में हुई थी 1686.4 मिमी. बरसात

मौसम विज्ञानी पीके साहा ने बताया कि राजधानी में इसके पूर्व वर्ष 2006 में सीजन में 1686.4 मिमी. बरसात हुई थी। इसके बाद राजधानी में इस सीजन में बुधवार शाम तक 1694.0 मिमी. बरसात हो चुकी है। अभी सीजन(30 सितंबर) में 12 दिन शेष भी हैं। साहा के मुताबिक प्रदेश में अभी भी मानसून सक्रिय है। इससे फिलहाल बरसात का सिलसिला अभी जारी रहेगा।

चार और सिस्टम सक्रिय

पीके साहा के मुताबिक पूर्वी-पश्चिमी द्रोणिका सौराष्ट्र से बंगाल की खाड़ी तक बनी है। जो महाराष्ट्र, तेलंगाना, कोस्टल आंध्र प्रदेश से होकर गुजर रही है। बंगाल की खाड़ी एवं उससे लगे दक्षिणी आंध्र प्रदेश तटीय क्षेत्र पर हवा के ऊपरी भाग में चक्रवात बना हुआ है। इसके गुरुवार सुबह तक कम दबाव के क्षेत्र में बदलने की संभावना है। दक्षिण मध्य प्रदेश में हवा के ऊपरी भाग में चक्रवात बना हुआ है। साथ ही दक्षिण मध्य प्रदेश से बंगाल की खाड़ी तक एक द्रोणिका तटीय आंध्र प्रदेश तक हवा के ऊपरी भाग में बनी हुई है।