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भोपाल गणेशोत्सव: पढ़िए कहां कौन सी झांकी लगी है | BHOPAL NEWS

भोपाल। विघ्नहर्ता व सुखकर्ता भगवान गणेश की आराधना का महापर्व को लेकर लोगों में प्रतिमा स्थापना को लेकर उत्साह देखा जा रहा है। राजधानी के गली-मोहल्लों में गणपति स्थापना के लिए पंडाल अंतिम रूप ले रहे हैं। बाजार में बिक्री के लिए गणेश प्रतिमाएं भी नजर आने लगी है। इस बार ईको फें्रडली गणेश प्रतिमा की स्थापना को लेकर भी लोगों में काफी उत्साह है। दो सितंबर को गणेश चतुर्थी से 11 दिनी गणेशोत्सव की धूम रहेगी। 12वें दिन धूमधाम से चल समारोह निकलेंगे।

वाटरप्रूफ गणेश पंडाल

इस साल राजधानी सहित प्रदेशभर में हो रही जोरदार बारिश को देखते हुए, बब्बा को बारिश से बचाने के लिए वाटरप्रूफ के साथ ही विभिन्न डिजाइनों में गणेश पंडाल बनाए जा रहे हैं। कहीं जयपुर के हवा महल में लालबाग के राजा विराजेंगे, तो कहीं गोवर्धन पर्वत और उत्तराखंड के गंगोत्री मंदिर की झलक दिखाई देगी।

रेतघाट पर 40 फीट ऊंचा गोवर्धन पर्वत

रेतघाट पर भी करीब चार लाख रुपए की लागत से 40 फीट ऊंचा गोवर्धन पर्वत बनाया जा रहा है। गणेश उत्सव समिति रेतघाट के अध्यक्ष महेंद्र साहू ने बताया कि पर्वत के अंदर चार गुफाएं रहेंगी, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण, भगवान शंकर, माता पार्वती और गणेश बाल रूप में विराजमान रहेंगे। 

कोलार में लालबाग के राजा के लिए हवा महल

इसी प्रकार कोलार के बीमा कुंज में इस बार पांच लाख रुपए से अधिक की लागत से लालबाग के राजा के लिए जयपुर के हवा महल की तर्ज पर झांकी तैयार की जा रही है। झांकी में 14 फीट ऊंची प्रतिमा को विराजमान किया जाएगा।

पीपल चौक में भोपाल के राजा

राजधानी में सबसे पहले गणेश उत्सव की परंपरा पीपल चौक से ही शुरू हुई थी। यहां आजादी के वर्ष (1947) से ही गणेश स्थापना की जा रही है। यहां बप्पा भोपाल के राजा शहर के सबसे अमीर गणपति में शुमार है। आभूषण और साज सजा के साथ धार्मिक परम्पराएं निभाने में भी ये अग्रणी है। 

कोलार, बैरागढ़ व भेल क्षेत्र में कई जगह भव्य झांकी 

धारा 370 की झलक पुराने शहर समेत कोलार, बैरागढ़ व भेल क्षेत्र में भी कई जगह भव्य झांकी पंडाल तैयार हो रहे हैं। इस बार भी कई उत्सव समितियों की झांकियों में जम्मू कश्मीर से हटाई गई धारा 370 की की झलक दिखाई देगी। न्यू मार्केट में उत्तराखंड के गंगोत्री मंदिर की तर्ज पर 65 फीट ऊंचा तैयार हो रहा पांडाल पूर्ण आकार ले चुका है। यहां गणेशजी के साथ उनकी पत्नी ऋ द्घि-सिद्घि व पुत्र शुभ-लाभ के दर्शन भी होंगे।