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केरवा डैम: मछलियां पकड़े आए थे, बाढ़ आ गई, घिर गए | BHOPAL NEWS

भोपाल। केरवा डैम के नीचे मछली पकड़ने गए दो युवक अचानक तेज बहाव के बीच फंस गए। नगर निगम की रेस्क्यू टीम ने एक घंटे की मशक्कत के बाद दोनों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। सोमवार सुबह करीब 11 बजे केरवा के पास ग्राम सरौलीपुरा निवासी 21 वर्षीय कांजी, झाबुआ से आए अपने जीजा शिवा को केरवा डैम घुमाने ले गया था। डैम का एक गेट खुला होने से वहां काफी पानी था। दोनों मछली पकड़ने बहाव क्षेत्र में पहुंच गए।

कांजी को लगा कि गेट बंद हो रहा है, लेकिन कुछ ही मिनट में अचानक दूसरा गेट खुल गया। इससे पानी का बहाव अचानक और तेज हो गया, जिससे दोनों बहाव के बीच फंस गए। हालांकि, दोनों डरे सहमे पानी के बीच एक चट्टान पर एक दूसरे का हाथ पकड़कर बैठ गए। मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों ने इसकी सूचना नगर निगम के फतेहगढ़ स्थित कंट्रोल रूम को दी। इस बीच अगर तीसरा डैम का गेट खुल जाता तो दोनों युवकों को बचा पाना मुश्किल होता।

ऐसे किया रेस्क्यू

कोलार फायर स्टेशन प्रभारी पंकज खरे छह लोगों की टीम के साथ फायर ब्रिगेड लेकर मौके पर पहुंचे। पानी का बहाव तेज होने के कारण गोताखोरों की टीम के लिए युवकों तक पहुंचना संभव नहीं था। लिहाजा, आनन-फानन में फायर ब्रिगेड में रखी 25 फीट लंबी फोल्डिंग सीढ़ी को खोला गया और इसका एक सिरा रस्सी से बांधकर दूसरा सिरा चट्टान तक पहुंचाया गया। इस दौरान पानी का बहाव इतना तेज था कि सीढ़ी तक पानी आ रहा था।

इसके बाद गोताखोर मजहर और संजय बाथम ने अपने कमर में रस्सी बांधी और सीढ़ी पर बैठकर धीरे-धीरे दूसरे छोर तक पहुंचे। इसके बाद युवकों को लाइफ जैकेट पहनाकर सीढ़ी के सहारे एक-एक कर सकुशल बाहर निकाला गया। इस पूरे ऑपरेशन में करीब एक घंटे का समय लगा।

ऑटोमेटिक खुलते हैं गेट, बंद करने का सिस्टम नहीं

निगम की टीम ने केरवा डैम में तैनात जलसंसाधन विभाग के अधिकारियों को गेट बंद करने के लिए कहा, लेकिन उन्होंने बताया कि गेट बंद करना उनके हाथ में नहीं है। दरअसल, केरवा डैम में आटोमेटिक गेट हैं। जैसे ही पानी का लेवल बढ़ता है गेट खुलने लगते हैं। इसे बंद करना संभव नहीं है। पानी का लेवल घटने पर गेट अपने आप बंद हो जाते हैं। इसमें कुल आठ गेट हैं।

डैम में कई बार अचानक पानी बढ़ जाता है और गेट खुल जाते हैं, इसलिए बारिश के मौसम में पानी के नजदीक न जाएं। सुरक्षा के लिए हमारे विभाग के कर्मचारी, होमगार्ड तैनात किए गए हैं, जो लोगों अंदर जाने से रोकते हैं, इन्हें भी रोका गया था, लेकिन ये अनसुना करके नीचे उतर गए। गेट खुलने के बाद बहाव में फंसने का यह पहला मामला है। जगह-जगह चेतावनी बोर्ड भी लगे हैं। लोगों को नियम का पालन करना चाहिए।
- नितिन कुहिकर, एसडीओ जल संसाधन विभाग

ऐसा लगा जैसे नया जीवन मिल गया

कांजी ने बाहर निकलकर कहा कि उसे पानी का बहाव देखकर लगा था, मानो अब मौत से सामना हो गया है। अब बच पाना मुश्किल है। बचने के बाद दोनों की आंखों में खुशी साफ झलक रही थी। उन्होंने कहा कि ऐसा लग रहा है, जैसे नया जीवन मिल गया हो।