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क्या बेहतर नागरिक बनाएगी, नई शिक्षा नीति ? | EDITORIAL by Rakesh Dubey

नई दिल्ली। जल्दी ही आपके बच्चे नई शिक्षा नीति से तालीम पाएंगे| यह शिक्षा नीति 2040 को ध्यान में रखकर बनाई गई है। यह तो सर्वज्ञात तथ्य है कि केंद्र सरकार ने कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता में नई शिक्षा नीति हेतु समिति का गठन किया था। उसने नवीन शिक्षा नीति का खाका बनाकर तैयार कर दिया है । अब सरकार ने नई शिक्षा नीति का मसौदा सार्वजनिक कर उस पर सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। जल्दी थी यह शिक्षा नीति अमल में लाए जाने की बाते कही जा रही है।

गौरतलब है कि वर्तमान में जो शिक्षा नीति अमल में लाई जा रही है वह वर्ष 1986 में तैयार की गई थी, जो कोठारी आयोग के प्रतिवेदन पर आधारित है। सामाजिक दक्षता, राष्ट्रीय एकता तथा समाजवादी समाज की स्थापना करने का लक्ष्य निर्धारित करना उसकी थीम थी। यूं तो 1992 में उसमे कुछ बदलाव किए गए, उद्देश्यों में फेरफार भी की गई, लेकिन उसके बाद भी वह वर्तमान दौर की आवश्यकताओं की पूर्ण रूपेण पूर्ति कर पाने में सफल नहीं हो पाई है।

मौजूदा केन्द्र सरकार ने के कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता में नई समिति का गठन किया जिसे 2020 से 2040 तक का ध्यान रखते हुए नई नीति का मसौदा तैयार करना था । इस नई शिक्षा नीति से लोगों को अनगिनत अपेक्षाएं है। सबसे बड़ी बात है नई पीढ़ी में नैतिकता कायम करना। शिक्षा में गुणवत्ता का प्रश्न हमेशा से पहले स्थान पर रहा है। इसलिए शिक्षा में गुणवत्ता कायम रखने के लिए जमीनी वास्तविकताओं का अध्ययन करके, फिर उसके अनुसार नीति निर्माण और मॉनिटरिंग वाले सिस्टम को मजबूत बनाने की जरूरत है। नई शिक्षा नीति में सभी लोग अध्यापकों के प्रति सम्मान, सरकारी स्कूलों की साख, निजीकरण, व्यापारिकरण, शोध, इनोवेशन, क्वालिटी और रोजगार आदि से जुड़ी समस्याओं का हल ढूंढना चाहेंगे। अब अंक नियंत्रित ज्ञान प्राप्त करने की व्यवस्था को समाप्त करके व्यक्तित्व विकास एवं कौशल विकास के पक्षों पर अधिक महत्व दिए जाने की आवश्यकता है।

स्कूली शिक्षा और उच्च शिक्षा में शिथिलता भी शिक्षा व्यवस्था का एक बड़ा दोष है। शिक्षकों की नियुक्ति पारदर्शी तरीके से हो, शिक्षक प्रशिक्षण आधुनिक विधि से सम्पन्न करवाए जाए। नई तकनीक, संचार और गैजेट का उपयोग अधिक से अधिक किया जाए, साथ ही साथ इसके दुरुपयोग के प्रति सजगता भी हो। मूलरूप से शिक्षा के माध्यम से आत्मगौरव, मूल्य चेतना और विवेक बोध आदि आवश्यक उद्देश्यों की आवश्यकता की पूर्ति के प्रयत्न होने चाहिए, जिससे कि आज शिक्षितों के नाम पर जो नैतिक मूल्य विहीन सुविधाजीवियों की कर्तव्यबोध विहीन भीड़ हो गई है उससे मुक्ति मिल सके। आज के युग में व्यावहारिक स्तर पर प्रमाणपत्रों और उपाधियों से अधिक योग्यता और गुणवत्ता पर ध्यान देने की आवश्यकता है।

देश उम्मीद करता है कि नई शिक्षा नीति देश की अपेक्षाओं और आज की आवश्यकताओं के अनुरूप होगी। यह नीति राष्ट्रीय आकांक्षाओं पूर्ति के साथ ही विश्व में मानवता की समस्याओं का समाधान करने वाली हो। इस नीति से बच्चों में अपने उत्तरदायित्व, कर्तव्य तथा अपने देश के कानून और नागरिकों के प्रति सम्मान की भावना पैदा हो सके। शिक्षा नीति सही अर्थों में राष्टÑ नीति है, जोकि किसी भी राष्ट्र की दिशा निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उम्मीद है नई शिक्षा नीति विश्व के लिए बेहतर भारतीय तैयार करने में सहायक होगी |
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श्री राकेश दुबे वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं।
संपर्क  9425022703        
rakeshdubeyrsa@gmail.com
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