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ग्वालियर के महल में चल रहा है समानांतर मंत्रालय

भोपाल। खबर आ रही है कि मध्यप्रदेश में तीसरे सबसे दिग्गज कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के महल 'जय विलास पैलेस' में एक समानांतर मंत्रालय चल रहा है। बता दें कि इन दिनों सिंधिया का महल चर्चाओं में है। पिछले दिनों यहां एक सरकारी मीटिंग का आयोजन हुआ था। इस मीटिंग में कलेक्टर सहित ग्वालियर के सभी अधिकारी मौजदू थे। भाजपा ने इसे असंवैधानिक बताया है। 

खबर आई है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ग्वालियर के जयविलास पैलेस में कलेक्टर, नगर निगम कमिश्नर, स्मार्ट सिटी सीईओ समेत तमाम बड़े सरकारी अधिकारियों की बैठक बुलाई थी, जिसमें ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ग्वालियर में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट को लेकर समीक्षा बैठक की थी। इस बैठक में ग्वालियर के सभी स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। 

अब इस मीटिंग को लेकर बीजेपी नेता और मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने सवाल उठाया है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया ने किस प्रोटोकॉल से सरकारी अधिकारियों के साथ बैठक की और वह भी अपने महल में। नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने इस बैठक को असंवैधानिक बताया है।

गोपाल भार्गव ने आरोप लगाया कि मध्यप्रदेश में तीन-तीन मुख्यमंत्रियों की सरकार चल रही है और कमलनाथ चाह कर भी ज्योतिरादित्य सिंधिया या दिग्विजय सिंह पर कार्रवाई नहीं कर सकते। अगर करेंगे तो उनकी डेढ़ पैर की सरकार किसी भी वक्त गिर सकती है। बीजेपी का कहना है कि सरकारी अधिकारियों से भी यह पूछा जाना चाहिए कि वह इस बैठक में क्यों गए थे?

ग्वालियर कलेक्टर का कहना है कि वह आधिकारिक मीटिंग नहीं बल्कि एक अनौपचारिक मुलाकात थी। हालांकि ग्वालियर कलेक्टर के दावे पर सवाल इसलिए खड़े हो रहे हैं क्योंकि पूर्व सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के टूर प्लान में साफ लिखा है कि उनकी बैठक स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट को लेकर थी। वहीं, खुद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा है की यह बैठक ग्वालियर के भविष्य के नक्शे के लिए रखी गई थी।

महल में चल रहा है समानांतर मंत्रालय

अब खबर यह भी आ रही है कि महल में एक सामानांतर मंत्रालय चल रहा है। 2 या इससे अधिक रिटायर्ड आईएएस अफसर यहां मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव की भूमिका में हैं। सिंधिया के कोटे के सभी मंत्रालयों के फैसले इसी सचिवालय में होते हैं। नोटशीट तैयार होतीं हैं जिन पर मंत्रीगण आंख बंद करके हस्ताक्षर करते हैं। इसके अलावा ग्वालियर, शिवपुरी और गुना सहित कुछ अन्य विधानसभाओं से संबंधित फैसले भी यहीं होते हैं। सरकारी औपचारिकता के लिए यहां से फाइलें भोपाल भेजी जातीं हैं।