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MP की यू-टर्न सरकार: अब नए नाम से इन्वेस्टर्स मीट कराने जा रही है | POLITICAL NEWS

संबंधित इमेजभोपाल। मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार यू-टर्न में नया रिकॉर्ड बनाने जा रही है। सीएम कमलनाथ (CM KAMAL NATH) ने चुनाव प्रचार के दौरान जिन बातों का विरोध किया था, जिन्हे गलत बताया था, अब वही काम किए जा रहे हैं। सीएम कमलनाथ ने इन्वेस्टर्स मीट (Kamal Nath Investors Meet) को गलत बताया था। उन्होंने ऐलान किया था कि इन्वेस्टर्स मीट से निवेश नहीं आता। उन्हे मालूम में निवेश (INVESTMENT) कैसे आता है लेकिन अब कमलनाथ सरकार इन्वेस्टर्स मीट की तैयारियां कर रही है। बस नाम बदल दिया गया है। शिवराज सिंह सरकार में जिस आयोजन को इन्वेस्टर्स मीट कहा जाता था कमलनाथ सरकार में उसी आयोजन को 'मैग्नीफिशेंट एमपी" (Magnificent MP) नाम दिया गया है। 

दर्जनों मामलों में यू-टर्न ले चुकी है सरकार

कमलनाथ सरकार ने पिछले चार महीने से अब तक अफसरों के जो तबादले किए हैं, उनमें बार-बार संशोधन किए। वंदेमातरम् और मीसाबंदियों की पेंशन में भी सरकार ने यू-टर्न लिया। कुछ ऐसे मामले भी हैं जिनमें सरकार के फैसले लीक हुए और आधिकारिक आदेश जारी होने से पहले ही यू-टर्न लेना पड़ा। 

वंदेमातरम् पर फैसला पलटा

कमलनाथ सरकार को पिछले कुछ दिनों में कई अहम मामलों में निर्णय लेने के बाद बैकफुट पर आना पड़ा है। सबसे पहला मामला वंदेमातरम् का था, मंत्रालय में हर महीने की पहली तारीख को होने वाला वंदेमातरम् गायन सरकार ने आनन-फानन में बंद कराया। चारों तरफ विरोध हुआ तो फिर शुरू करवा दिया।

मीसाबंदी पर भी यू-टर्न

मीसाबंदी पेंशन रोकने के लिए सरकार ने आदेश जारी किया। जीएडी मंत्री डॉ. गोविंद सिंह ने कहा कि इनके खिलाफ अपराध भी दर्ज कराया जाए। दबाव बना तो फिर नया आदेश जारी किया कि सिर्फ भौतिक सत्यापन कर सम्मान निधि यानी पेंशन शुरू कर दी जाए।

मैग्नीफिशेंट एमपी इंदौर में 18-19 को

कांग्रेस ने अपने वचन पत्र में कहा था कि वह इन्वेस्टर्स मीट का आयोजन कर फिजूलखर्ची नहीं करेगी पर निवेशकों को आकर्षित करने के लिए सरकार इंदौर में 18 और 19 अक्टूबर को मैग्नीफिशेंट एमपी के नाम से निवेशकों का सम्मेलन करने जा रही है।

तबादलों में बार-बार संशोधन

सत्ता में आने के बाद से ही तबादलों को लेकर सरकार असमंजस में रही है। आचार संहिता लागू किए जाने के पहले कलेक्टर-कमिश्नर और प्रमुख सचिवों के जितने तबादले किए, उनमें कई बार संशोधन किया गया। एक अफसर को लापरवाही के नाम पर हटाया, हफ्ते भर बाद उसे प्राइम पोस्टिंग दे दी। यह सिलसिला अब तक चल रहा है।

सतना कलेक्टर सतेंद्र सिंह को पहले हटाया, फिर वहीं कर दिया। वित्त सचिव बनाए गए गुलशन बामरा को सागर कमिश्नर बनाया, फिर संशोधन कर दिया। चुनाव आयोग ने जिन कलेक्टरों को हटाया था, उनमें श्रीनिवास शर्मा को फिर से छिंदवाड़ा और ललित दाहिमा का पुन: शहडोल में तैनात कर दिया गया।

हमने यू-टर्न नहीं लिया

सरकार ने किसी भी विषय पर यू-टर्न नहीं लिया है। यदि हमने कुछ कहा है और उसमें परिवर्तन किया है तो उसका अध्ययन करने के बाद शासन को लगता है कि इस संबंध में बदलाव जरूरी है तो शासन उस बदलाव को उचित मानता है। कई विषयों पर राज्य शासन की ओर से या वचन पत्र में उल्लेख किया होता है तो उसके बाद जब तथ्य मालूम पड़ते हैं कि जनता का हित किसमें है या नीति परिवर्तन करने से लाभ होगा तो ऐसी नीतियां बदली जा सकती हैं, इनमें यूटर्न जैसी कोई बात नहीं है। 
- सीपी शेखर, उपाध्यक्ष, मप्र कांग्रेस कमेटी