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बीमा धारक किसी भी अस्पताल में इलाज कराए, मेडिक्लेम देना होगा: हाईकोर्ट | NATIONAL NEWS

नई दिल्ली। यदि आपके पास मेडिक्लेम पॉलिसी (Mediclaim policy) है तो आप भारत के किसी भी अस्पताल में इलाज कराएं, बीमा कंपनी को आपके इलाज का भुगतान करना पड़ेगा। यह फैसला दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने दिया है। इससे पहले कुछ कंपनियां शर्त रखतीं थीं कि केवल उनकी लिस्ट में दर्ज अस्पतालों में ही इलाज कराया जा सकता है। 

पत्रकार श्री अभिनव गर्ग एवं दुर्गेश नंदन झा की रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली हाई कोर्ट ने फैसला (High Court Decision) दिया है कि इंश्योरेंस कंपनियां (Insurance companies) वैध मेडिकल पॉलिसी होल्डर्स (Insurance holder) के क्लेम का सम्मान करें जिन्होंने किसी भी गवर्नमेंट रजिस्टर्ड हॉस्पिटल से ट्रीटमेंट करवाया हो। कोर्ट के अनुसार ऐसे सभी अस्पतालों में कैशलेस सुविधाओं को भी बढ़ाया जाना चाहिए। इस तरह से कोर्ट ने उस प्रणाली पर पूरी तरह से रोक लगा दी जिसमें हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियां और थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेशन जोर देती थीं कि इंश्योरेंस क्लेम के लिए हॉस्पिटल को उनके साथ रजिस्टर होना जरूरी है। इंश्योरेंस कंपनियां और थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेशन भी तय करते हैं कि कौन सा अस्पताल कैशलेश सुविधाओं (Cashless facilities)के बढ़ा सकता है। 

हाई कोर्ट ने माना कि सभी मरीज मेडिकल इंश्योरेंस के लिए हकदार हैं जिसमें कैशलेस सुविधाएं भी शामिल हैं, हालांकि इसके लिए उनके पास वैध मेडिकल क्लेम पॉलिसी होनी चाहिए और पब्लिक सेक्टर इंश्योरेंस का ग्रुप जनरल इंश्योरेंस पब्लिक सेक्टर असोसिएशन (GIPSA) अस्पतालों के उनके साथ रजिस्टर करने को लेकर दबाव नहीं डाल सकता। 

इससे पहले वर्तमान आदेश आंखों के ट्रीटमेंट तक सीमित था। कोर्ट ने GIPSA के गाइडलाइंस और गवर्नमेंट रजिस्टर्ड हॉस्पिटल को शामिल न करने को लेकर 'नेटवर्क हॉस्पिटल' के बाह्य सिस्टम में गड़बड़ी पाई। इसलिए इसे अब आंखों के अलावा दूसरे ट्रीटमेंट में भी लागू किया जा सकता है। इस आदेश को 31 मई को तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन और न्यायमूर्ति बृजेश सेठी की पीठ द्वारा पारित किया गया है।