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अतिथि शिक्षकों को अनुभव प्रमाण पत्र के जाल में क्यों उलझाया जा रहा है | KHULA KHAT to CM KAMAL NATH

आदरणीय महोदय जी, म.प्र स्‍कूल शिक्षा विभाग ने आनलाइन अतिथि शिक्षकों की चयन प्रक्रिया शुरू करते समय पिछले साल सत्र वार उनके अनुभव प्रमाण पत्र संस्‍था प्रभारी व संकुल प्राचार्य से सत्‍यापित कराकर पोर्टल पर अपलोड करा लिए थे अब पुन: अतिथि शिक्षक प्रबंधन प्रणाली से प्राप्‍त अनुभव के सत्‍यापन का काम शुरू करकर अतिथि शिक्षकों को पिछले 1 माह से परेशान किया जा रहा है। आगामी शिक्षक भर्ती में पूर्व सरकार ने अतिथि शिक्षकों के लिए 25% पद आरक्षित किए थे। जिसके लिए पोर्टल से प्राप्‍त अनुभव प्रमाण पत्र का सत्‍यापन कार्य चल रहा है। स्‍कूल शिक्षा विभाग को न तो अपने पोर्टल पर भरोसा है न ही अपने अधिकारियों पर तभी तो पोर्टल पर दर्ज उपस्तिथि का सत्‍यापन किया जा रहा है। जो आफलाइन अनुभव प्रमाण पत्र पहले बनबा कर आनलाइन अतिथि शिक्षकों ने कराये थे जो कि सत्‍यापित थे। उनका कोई महत्‍व नहीं।

अब बात यहां यह आ रही है कि जिन अतिथि शिक्षकों का अनुभव संबंधी डाटा पोर्टल पर उपलब्‍ध नहीं हैै। उन्‍होने आफलाइन क्‍लेम फार्म पर अपने पोर्टल पर अनुउपलब्‍ध अनुभव संबंधी डाटा संस्‍था प्रधान से सत्‍यापित कराकर कर संकुल पर जमा कर दिए है परंतु उनको अभी पोर्टल पर अपलोड करने अथवा सत्‍यापन संबंधी निर्देश अभी तक नहीं आए है। इससे उन अतिथि शिक्षकों को नुकसान है जो 10-12 वर्षों से सेवा दे रहे है क्‍योंकि पोर्टल पर 2009-10 से अतिथि शिक्षकों का डाटा उपलब्‍ध है वह भी सीमित संख्‍या में। ऐसे मेे मेेेेरेे समान अतिथि शिक्षकोंं को घाटा है जो सत्र 2006-07 से अतिथि शिक्षक के रूप में सेवा दे रहे है। क्‍योंकि मेरा अनुभव संबंधी उपस्थिति डाटा पोर्टल पर 2013-14 से उपलब्‍ध है जबकि मै 2006-09 तक एवं 2011-17 तक निरंतर अतिथिशिक्षक रहा हूं। 

यहां मै अपने उदाहरण के माध्‍यम से प्रदेश स्‍कूल शिक्षा विभाग का सत्‍य बता रहा हूं कि यदि अतिथिशिक्षक भर्ती अथवा स्‍थायी शिक्षक भर्ती में अनुभव का प्रावधान होता है जिसकी मॉंग निरंतर अतिथिशिक्षकों द्वारा की जा रही है तो आफलाइन अनुभव सत्‍यापन न होने से जिन सत्रों अथवा अतिथिशिक्षकों का डाटा पोर्टल पर नहीं है उनको नुकसान होगा फिर इसी के नाम पर अतिथिशिक्षक भर्ती एवं स्‍थायी शिक्षक भर्ती को लेट किया जाएगा कांग्रेस  अतिथिशिक्षकों के नियमितिकरण का वचन देकर सत्‍ता में आई थी पर अभी तक कोई नीति इनके स्‍थायी करण को लेकर नहीं बना पायी बल्कि अतिथिशिक्षकों को हर साल अतिथिशिक्षक बनेे रहने की लड़ाई सरकार से लड़ना पड़ रही है अल्‍प मानदेय, अस्थिर रोजगार, तीन कालखंड के वेतन पर दिनभर कार्य, अवैतनिक उच्‍च कक्षाओं में नैदानिक शिक्षण सभी तरह से प्रदेेेेश में अतिथिशिक्षकों का शोषण हो रहा है आनलाइन भर्ती प्रक्रिया से नए अनुभवहीन अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति इस सत्र में की गई वह भी बीच सत्र में जिससे बोर्ड परीक्षाओं में शासकीय स्‍कूलों का परीक्षा परिणाम बिगड़ा है अत: अतिथिशिक्षकों की भर्ती में 10 अंक प्रतिवर्ष अनुभव के दिए जाए अतिथि शिक्षकों  को अधिकतम  10 वर्ष तक साथ ही उत्‍त्‍र प्रदेश शिक्षामित्रों की भांति 2.5 अंक प्रतिवर्ष अनुभव अधिकतम 10 वर्ष तक स्‍थायी शिक्षक भर्ती में दिए जाए और तत्‍काल स्‍कूल शिक्षा विभाग जो आफलाइन अनुभव अतिथि शिक्षकों द्वारा संस्‍था प्रधान से सत्‍यापित कराकर संकुल में जमा किए जा चुके है उनके सत्‍यापन का निर्देश भेजे ताकि उनको वरिष्‍ठता का लाभ मिल सके जो उनकी तात्‍कालिक मॉंग अतिथि शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया के संबंध में है।
सादर धन्‍यवाद
आशीष कुुमार बिरथरिया