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INDORE NEWS : मालवा उत्सव में नहीं दिखी कोई रौनक निराश हुए लोग

इंदौर। लोक संस्कृति मंच द्वारा कराए जाने वाले मालवा उत्सव.में हर साल शहर के लाखों लोग पहुंचते हैं। कई राज्यों के लोक कलाकारों का नृत्य और शिल्प मेले में देश दुनिया के शिल्पकारों की कलाकृतियां देखने बड़ी तादाद में लोग लालबाग में होने वाले इस उत्सव में आते हैं। इस बार रविवार 9 जून से इसकी शुरुआत की गई। हर वर्ष की तरह शहर के कई क्षेत्रों से लोग यहां पहुंचे, लेकिन निराश लौटे।   

मालवा उत्सव की जो रौनक इस शहर ने देखी है वो नदारद थी। लोक संस्कृति मंच ने घोषित किया था कि 9 जून से शिल्प मेला शुरू हो जाएगा। इसलिए लोग भर दोपहर में भी लालबाग पहुंच गए। लेकिन मेले के नाम पर सिर्फ एक दुकान खुली। बाकी कई दुकानें तो लगी ही नहीं। जो लगी उनमें में माल अभी बोरों में बंद है। लिहाज़ा खरीदारों को लौटना पड़ा। और यह सब तब है जब लोक संस्कृ़ति मंच के अध्यक्ष और इस उत्सव के कर्ता-धर्ता शंकर लालवानी सांसद बन चुके हैं। उम्मीद तो थी कि मालवा उत्सव इस बार और भव्य होगा, लेकिन उत्सव के 20 साल के इतिहास में ये सबसे फीकी शुरुआत रही। पिछले 20 साल से होते आ रहे इस उत्सव में ऐसा भी पहली बार हुआ है कि नृत्य प्रस्तुतियां दूसरे दिन से कराई जाएंगी। पहले दिन कोई नृत्य प्रस्तुति नहीं हुई। 

शाम 6 बजे तक भी एक-दो दुकानें ही सजी थीं। 20 साल में पहली बार नृत्य भी अगले दिन यानी सोमवार से कराए जाएंगे। आयोजकों का कहना है कि तारीख देर से तय हुई। इस वजह से उत्सव आज उस तरह शुरू नहीं हो पाया जैसा होना चाहिए था। सोमवार से उत्सव यथावत होगा। समारोह से जुड़े नितिन तापड़िया का कहना है कि तारीख देर से तय हुई इसलिए शिल्प मेले में अधिकतर दुकानों की बुकिंग अभी हो नहीं पाई है। 

आज से शुरू नहीं हुआ है तो कल से हो जाएगा, शिल्प मेला भी लग जाएगा 

इस बार आचार संहिता के चलते तारीख देरी से तय हो सकी। शिल्प मेला क्यों नहीं लगा मैं पता लगाता हूं, मैं इंदौर में नहीं हूं। इस बार पार्लियामेंट सेशन 6-7 जून को होना था। इसे 16 तक बढ़ा दिया गया। मालवा उत्सव जो इस सत्र के बाद होना था वो हमें प्रीपोंड करना पड़ा। इस वजह से कुछ गड़बड़ी हो गई। उत्सव आज से शुरू नहीं हुआ है तो कल से व्यवस्थित हो जाएगा। शिल्प मेला आज से नहीं लगा है तो कल से लग जाएगा। बाहर से जो शिल्पकार आते हैं उनका कहना है कि हमें सेटअप जमाने के लिए एक दिन चाहिए। 
- शंकर लालवानी, सांसद और लोक संस्कृति मंच के संयोजक