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BALAGHAT में हुआ एक साथ 70 पुस्तकों का विमोचन

भोपाल। अंतराशब्दशक्ति समूह द्वारा जिसकी संस्थापक हैं प्रीति सुराणा एक भव्य कार्यक्रम में हुआ इंदौर से आयी कवियत्री रागिनी स्वर्णकार (शर्मा) व्याख्याता घाटा बिल्लोद (जिला धार) के गीत संग्रह मीत रे का विमोचन एवम साहित्यकार स्वाभिमान सम्मान से सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मध्यप्रदेश के केबिनेट मंत्री श्री प्रदीप जायसवाल के द्वारा किया गया पुस्तक विमोचन एक भव्यकार्यक्रम जो अपने आप मे अनूठा था एक साथ 70 पुस्तकों का विमोचन।मुख्यातिथि आ.प्रदीप जायसवाल ,आ.योगेंद्र निर्मल भूतपूर्व विधायक,आ.नन्दकिशोर सुराणा(अध्यक्ष जैन श्वेताम्बर संघ वारा सिवनी) आ.सोहन वैद्य वरिष्ठ  सम्पादक एवम पत्रकार, डॉ भारती सुराना (संरक्षक अन्तराशब्दशक्ति) कार्यक्रम का प्रारम्भ दिनांक 01 जून 2019 को दोपहर 1:00बजे हुआ। उदघाटन आ.विवेक पटेल ,अध्यक्ष नगरपालिका वारा सिवनी,एवम आ. नरेंद्र श्रीवास्तव अटल,कवि एवम प्रखर प्रवक्ता, महेश्वर ने किया।

शाम 6:00 बजे प्रारम्भ हुई काव्यगोष्ठी एवम मिलन समरोह काव्यगोष्ठी का संचालन कवि  नरेंद्र श्रीवास्तव अटल द्वारा किया गया। काफी संख्या में साहित्यकार सम्मिलित हुए ।कवियत्री रागिनी स्वर्णकार शर्मा ने खुशबुएँ बिखर गयीं गीत सुनाया। वारासिवनी के वरिष्ठ साहित्यकारों,ने कवितापाठ किया,कोटा से पधारी हुई पिंकी परुथी, होशंगाबाद से कीर्ति वर्मा, बालाघाट से अलका चौधरी, अजमेर से चेतना उपाध्याय, प्रीति अज्ञात जी अहमदाबाद,झांसी से बृजेश शर्मा'' विफल', हैदराबाद से आ.सुनीता लुल्ला जी, छत्तीसगढ़ से अनीता मंदिलवार, अदिति जी वारा सिवनी से,दीपसिखा सागर, सहित अनेक रचनाकारों ने काव्यपाठ किया।

देश के विभिन्न राज्यों से पधारे हुये नवोदित तथा वरिष्ठ साहित्यकारों का उपस्थित होना एक मिसाल बन गया वारासिवनी ही नहीं मध्यप्रदेश एवं देश के लिए गौरव के क्षण रहे। अन्तराशब्दशक्ति समूह के विषय मे अपने अनुभव बताते हुए परिचय कार्यक्रम में कवियत्री रागिनी स्वर्णकार (शर्मा)ने कहा कि जिनमे सृजन के बीज सुप्त पड़े हुए थे, उन्हें सींच कर प्रीति सुराणा जी ने आज पुष्पित और पल्लवित किया है। जो देश भर में महक बिखेर रहे हैं और वो हौंसला दिया है नवोदितों को कि हर सृजनकर्ता जो अन्तराशब्दशक्ति से जुड़ा है वह यही कहता है कि..

हर घड़ी,हर लम्हा नई मुस्कान चाहिए
ऊंचाइयां छूँ लूँ वो हर आयाम चाहिए 
अंधेरों में खोना मेरी फितरत नहीं है,
मुझे अपने वजूद की पहचान चाहिए