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SAFE DELIVERY APP DOWNLOAD करें, गर्भावस्था और प्रसव को सुरक्षित बनाएं



सुरक्षित प्रसव कराने के लिए सेफ डिलेवरी एप लांच किया गया है। इस एप में गर्भावस्था एवं प्रसव के दौरान होने वाली जटिलताओं के उपचार का सरल तरीका बताया जाएगा। साथ ही स्टाफ नर्स, एएनएम का प्रसव संबंधी चिकित्सीय कौशल भी विकसित होगा। मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन प्रयास कर रहा है। इसके लिए एक ओर प्रसव पूर्व जांच, संस्थागत प्रसव, होम बेस्ड न्यू बार्न केयर के साथ ही अन्य तमाम योजनाओं पर जोर दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर तकनीकी पहलुओं पर भी पूरी तरह से फोकस किया जा रहा है। अब सेफ डिलेवरी एप लांच किया गया है। 

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक पंकज कुमार ने प्रदेश के सभी एडी हेल्थ और सीएमओ को पत्र जारी कर सेफ डिलेवरी एप का उपयोग अपने-अपने जिले की सभी स्वास्थ्य इकाइयों में करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि सेफ डिलेवरी एप एक नवीनतम स्वास्थ्य उपकरण है। इसके द्वारा एनीमेटेड फिल्मों के माध्यम से बहुत ही सरल तरीके से प्रसव के दौरान होने वाली जटिलताओं के उपचार का तरीका बताया जाएगा। 

सेफ डिलिवरी एप के माध्यम से स्वास्थ्य इकाइयों में काम करने वाली स्टाफ नर्स और एएनएम का प्रसव संबंधी चिकित्सीय कौशल को विकसित किया जा सकेगा। स्वास्थ्य कार्यकर्ता इस एप को ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह से उपयोग कर सकते हैं। प्रदेश की समस्त चिकित्सा इकाइयों के प्रसव कक्ष एवं मैटरनिटी ओटी में कार्यरत स्टाफ नर्स, एएनएम और चिकित्सा पदाधिकारियों द्वारा इतनी सारी खूबियों वाले इस एप का उपयोग कराने पर जोर दिया जा रहा है। 

क्या कहते हैं आंकड़े 
मातृ एवं शिशु मृत्यु दर के आंकड़ों की गौर करें तो प्रदेश में इसमें गिरावट देखने को मिल रही है। वार्षिक स्वास्थ्य सर्वे 2012-13 के अनुसार प्रदेश की मातृ मृत्यु दर प्रति लाख 258 थी, जो कि रजिस्ट्रेशन सिस्टम 2014-16 में घटकर 201 पर आ गई। इसी प्रकार शिशु मृत्यु दर 2014 के अनुसार प्रति हजार 48 थी, जो कि 2016 में 43 दर्ज की गई।
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