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जयस: डॉ हिरा अलावा का जलवा खत्म, महेंद्र कन्नौज कांग्रेस में शामिल | MP NEWS

भोपाल। विधानसभा चुनाव से पहले तक धार सहित आसपास के कई जिलों में अपना जलवा दिखाने वाले आदिवासी संगठन 'जयस' और इसके अध्यक्ष डॉक्टर हिरा अलावा का जलवा अब खत्म हो गया है। डॉक्टर हिरा अलावा अब कांग्रेस के विधायक हैं। जयस ने जिस महेंद्र कन्नौज को धार लोकसभा से प्रत्याशी बनाया था, अब उसने भी कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर ली है। कुल मिलाकर जयस अब कांग्रेस का जेबी संगठन बन गया है। बता दें कि यह संगठन कांग्रेस और भाजपा के खिलाफ खड़ा किया गया था। महेंद्र के कांग्रेस में आ जाने के बाद डॉ हिरा अलावा की कांग्रेस में रही सही पूछपरख भी खत्म हो जाएगी। 

जयस के नेता महेंद्र कन्नौज ने धार के अमझेरा में शनिवार को राहुल गांधी की मौजूदगी में कांग्रेस पार्टी का दामन थाम लिया। उन्हें मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कांग्रेस पार्टी की सदस्या ग्रहण करवाई। इस दौरान राहुल गांधी, मुख्यमंत्री कमलनाथ, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सहित कई विधायक और कांग्रेस के नेता मंच पर मौजूद थे। महेंद्र कन्नौज को आदिवासी सामाजिक संगठन जयस ने लोकसभा में धार से अपना प्रत्याशी बनाया था, लेकिन उन्होंने नाम वापसी के आखिरी दिन अपना नामांकन वापस ले लिया था। 

हिरा अलावा से नाराज होकर नाम वापस ले लिया था
कन्नौज ने फाॅर्म वापस लेने की सूचना प्रदेश अध्यक्ष तक को नहीं दी थी। जयस के प्रदेश अध्यक्ष अंतिम मुजाल्दा ने ही इस बात की पुष्टि की थी कि इस संबंध में कन्नौज ने उन्हें कुछ नहीं बताया था। नाम वापस लेने को लेकर कन्नौज ने बताया था कि जयस के संरक्षक डाॅ. हीरालाल अलावा अभी तक बोल रहे थे कि मैं तुम्हारे साथ हूं, लेकिन मेरे एक भी नामांकन पत्र जमा करवाने के लिए वे नहीं आए। हम लोगों ने डाॅ. अलावा के कहने व उनके भरोसे पर ही चुनावी मैदान में आए थे। अब वे हमारे साथ नहीं है तो मैंने अपना नामांकन फाॅर्म वापस ले लिया है। कन्नौज ने यह भी कहा था कि मुझे जयस के साथियों पर पूरा भरोसा है, लेकिन मुझे यह कहते हुए दुख है कि जब लगा कि वे पूरी तरह से मेरे साथ नहीं हैं तो मैंने फाॅर्म वापस लेने का निर्णय ले लिया। 

उमंग सिंघार अब जयस नेताओं के नेता
कन्नौज ने रुपए लेकर फाॅर्म उठाने की बात पर कहा कि आदिवासी समाज सम्मान का भूखा होता है, उसे रुपयों की जरूरत नहीं होती है। इसके बाद खबर यह आई थी कि कन्नौज की फाॅर्म वापस लेने को लेकर वन मंत्री उमंग सिंघार से बात हुई थी। कन्नौज को प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने उसकी मांगों को पूरा करने का आश्वासन दिया था। इसके बाद ही उन्होंने फाॅर्म वापस लिया था।