BHOPAL में सिपाही ही चला रहा था हनीट्रैप रैकेट, 2 लड़कियां और 1 पुरुष भी शामिल | MP NEWS

भोपाल। 2017 में डीआईजी के नाम अपना इस्तीफा सोशल मीडिया पर वायरल करने वाले भोपाल पुलिस के आरक्षक 2943 संघरतन फरेले को गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि वो भोपाल में हनीट्रैप रैकेट चला रहा था। उसके रैकेट में 2 लड़कियां एवं एक अन्य पुरुष भी शामिल हैं। लड़कियां सोशल मीडिया के जरिए लोगों को जाल में फंसातीं थीं और आरक्षक संघरतन फरेले उन्हे ब्लैकमेल करता था। सिपाही संघरतन फरेले और उसके साथी को जेल भेज दिया गया है। 

एएसपी क्राइम निश्चल झारिया के मुताबिक इस पूरे रैकेट का खुलासा उस वक्त हुआ, जब 69 वर्षीय रिटायर्ड इंजीनियर ने पुलिस से इस बारे में शिकायत कर बताया कि सोशल मीडिया पर उनकी पहचान एक युवती से हुई थी। धीरे-धीरे उसने मोबाइल नंबर हासिल कर फोन पर बात शुरू कर दी। एक दिन उसने फोन कर एमपी नगर स्थित शॉपिंग मॉल के पास बुलाया फिर बातों में उलझा कर तलैया थाना क्षेत्र स्थित एक मकान में ले गई। यहां पहले से एक अन्य युवती थी। 

रिटायर्ड इंजीनियर युवती से बात कर रहे थे, तभी पुलिस वर्दी पहने और हाथ में वायरलेस सेट लिए एक व्यक्ति कमरे में दाखिल हुआ। उसके साथ एक युवक और था। दोनों ने गाली गलोच करते हुए केस दर्ज करने की धमकी दी। फिर रिटायर्ड इंजीनियर के कपड़े उतरवाकर जबरन युवतियों के साथ उनकी तस्वीर खींच ली। एएसपी ने बताया कि रिटायर्ड इंजीनियर की शिकायत पर पुलिस ने आरटीओ दफ्तर के पास से दो आरोपियों को धर दबोचा। पकड़े गए आरोपियों में अरेरा कॉलोनी निवासी 44 वर्षीय भूपेश राणा और 33 वर्षीय सिपाही संघरतन फरेले शामिल हैं।

धमकाया- केस से बचना है तो पांच लाख दो
आरोपियों ने रिटायर्ड इंजीनियर से कहा कि केस से बचना है तो पांच लाख रुपए दो। बुजुर्ग ने कहा मेरे पास इतनी रकम नहीं है। तो आरोपियों ने जेब में रखे छह हजार रुपए निकाल लिए और बाकी के पांच लाख रुपए बाद में देने की बात तय की। 

2017 में इस्तीफा देकर सुर्खियों में आया था सिपाही
आरक्षक 2943 संघरतन फरेले उन दिनों बागसेवनिया थाने में पदस्थ था। उसने डीआईजी के नाम इस्तीफा लिखकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया था। उसने आरोप लगाया था कि उससे रोज 16 घंटे काम लिया जाता है। विभाग में कर्मचारियों को प्रताड़ित किया जा रहा है।