बस 60 हजार वोट और चाहिए, जीत पक्की है: दिग्विजय सिंह | BHOPAL CHUNAV SAMACHAR

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बस 60 हजार वोट और चाहिए, जीत पक्की है: दिग्विजय सिंह | BHOPAL CHUNAV SAMACHAR

भोपाल। कांग्रेस प्रत्याशी दिग्विजय सिंह एक-एक का हिसाब लगाते हुए चल रहे हैं। 2014 के चुनाव में इस सीट से कांग्रेस करीब 4 लाख वोटों से हारी थी। यह मोदी लहर का कमाल था। दिग्विजय सिंह ने दावा किया है कि ये 4 लाख वोट रिकवर कर लिए गए हैं। बस 60 हजार वोट बाकी हैं जो कभी कांग्रेस को नहीं मिले। आने वाले दिनों में उन्हे भी हासिल कर लिया जाएगा। दिग्विजय सिंह पूरे आत्मविश्वास के साथ कहते हैं कि जीत तो पक्की है। दिग्विजय सिंह ने यह भी याद दिलाया कि 2009 में मात्र 60 हजार वोटों का अंतर था। यही अंतर बड़ी चुनौती है।

हवा के खिलाफ भी तो लड़कर देखना चाहिए

पिछले दिनों पत्रकार श्री अवनीश जैन ने दिग्विजय सिंह से लम्बी बातचीत की। दिग्विजय सिंह ने बताया कि कमलनाथ जी ने कहा- मुझे भोपाल से लड़ना है तो मैंने कहा- कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन, मैं हां कहने से पहले राहुल गांधी जी से बात करना चाहता हूं। फिर मुझसे राहुल जी ने कहा- अगर कमलनाथ जी चाहते हैं तो आपका क्या विचार है? मैंने कहा- तैयार हूं। हवा के साथ तो सभी बहते हैं, हवा के खिलाफ भी तो लड़कर देखना चाहिए।

भोपाल के लिए दिग्विजय सिंह की प्राथमिकताएं क्या हैं

श्री सिंह ने कहा कि मेरी प्राथमिकताएं हैं- शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और इंफ्रास्ट्रक्चर। इसके लिए मॉडल ऑफ गवर्नेंस डिसेंट्रलाइज्ड होना चाहिए। इतने बड़े प्रांत में सेंट्रलाइजेशन से गर्वेंनेस सफल नहीं हो सकती। मैंने मुख्यमंत्री रहते इस पर बहुत काम किया। मेरी नीतियों की वजह से मप्र ह्यूमन इंडेक्स में सबसे ऊपर पहुंचा और साक्षरता, शिशु मृत्यु दर, कुपोषण में जो सुधार हुआ, उससे प्रदेश सामाजिक मापदंड पर सबसे ऊपर पहुंचा। ये सब पंचायती राज और विकेंद्रीकरण के चलते ही हुआ था। मेरे इंफ्रास्टक्चर के फैसलों पर बाद में भाजपा ने काम किया। तब भाजपा विरोध करती थी। उदाहरण के लिए टोल रोड्स का कंसेप्ट सबसे पहले मप्र ने अपनाया था, पंचायती राज सबसे पहले मैंने लागू किया, दोनों सफल रहे।

दिग्विजय सिंह आजमगढ़ जाते हैं लेकिन अयोध्या क्यों नहीं जाते

श्री सिंह का कहना है कि मैं अयोध्या में राम जन्मभूमि कई बार गया। जब से रामलला टेंट में बैठे तब भी गया लेकिन, मैंने कभी इसे प्रचारित नहीं किया। ये सवाल नरेन्द्र मोदी से पूछिए कि वे पीएम बनने के बाद आज तक राम जन्मभूमि क्यों नहीं गए। नरसिम्हा राव जी 96 में सरकार बना लेते तो यह मसला हल हो चुका होता। तब शंकराचार्य जयेन्द्र सरस्वती, स्वरूपानंद सरस्वती आदि को लेकर श्रीराम जन्मभूमि रामालय ट्रस्ट बनाया था। सरकार उन्हें विवादित भूमि से बाहर की जमीन दे रही थी। मैं अपने धर्म का राजनीतिक उपयोग नहीं करता।

दिग्विजय सिंह तो मियां हुआ करते थे, अचानक हिंदुत्व क्यों जाग रहा है

जवाब:  इसमें उन्हें क्या ऐतराज होना चाहिए। वैसे राघौगढ़ फोर्ट में सात मंदिर हैं, उनमें अखंड ज्योत 100 साल से जल रही है, वो कौन सी छवि बनाने के लिए था। दशकों से मैं आषाढ़ पूर्णिमा में पंढरपुर मंदिर में पूजा के लिए जाता हूं, तीन बार गोवर्धन परिक्रमा की, वो किस छवि के लिए था। 

दिग्विजय सिंह ने राजनीति के 45 सालों में कितना कमाया

जवाब : लोगों ने ऐसी बहुत कोशिशें कर लीं लेकिन मेरा कुछ नहीं बिगड़ा। मेरे लिए क्रेडिबिलिटी बहुत जरूरी है। आज भी मुझ पर भ्रष्टाचार का आरोप नहीं लगा। ऐसा कोई नेता नहीं है, जो 45 साल से राजनीति और 10 साल तक सीएम रहा हो और उस पर करप्शन का चार्ज न लगा हो। मेरी संपत्ति वही है जो मेरे पिता ने रख छोड़ी थी।