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भाजपा की महिला आदिवासी नेता की कहानी, कल लालबत्ती थी, आज गुटखा बेचतीं है | SHEOPUR MP NEWS

14 April 2019

भोपाल। यह उस आदिवासी महिला की कहानी है जिसे भाजपा ने रातों रात स्टार बना दिया था। 2010 में इस महिला को मंच पर खड़ा करके भाजपा के दिग्गज नेताओं ने यह प्रमाणित किया था कि भाजपा में आम और गरीब लोगों को किस तरह बड़ा मौका दिया जाता है परंतु जैसे ही काम निकला, भाजपा ने इस महिला को भी घर भेज दिया। अब स्टार से बेकार हुई यह आदिवासी महिला नेता गुटखा, तंबाकू, बीड़ी बेचती है। 

बात श्योपुर जिले की हो रही है। महिला का नाम है गुड्डी बाई आदिवासी जिसे आरक्षित सीट होने के कारण 2010 में भाजपा नेताओं ने जिला पंचायत अध्यक्ष बनाया था। पूरे 5 साल 2015 तक गुड्डी बाई आदिवासी के ढाठ रहे, सरकारी बंगला, सरकारी गाड़ी, सरकारी नौकर, सरकारी कार्यालय, सहायक और गार्ड सबकुछ था। गुड्डी बाई आदिवासी को पता ही नहीं चला कि जिला पंचायत अध्यक्ष का काम सरकारी कार्यक्रमों में जाने के अलावा भी कुछ होता है। वो बस सरकारी कार्यक्रमों में उपस्थित होती रही और उसको अध्यक्ष बनवाने वाले नेता मनमानी करते है। गुड्डी बाई आदिवासी की सील उनके पास ही रहती थी। शाम को थककर लौटी गुड्डी बाई आदिवासी जहां नेताजी कहते, हस्ताक्षर बना देती। 5 साल बीते, गुड्डी बाई आदिवासी का काम खत्म तो पार्टी में उसकी पूछ परख भी खत्म। 

बीजेपी नेता गुड्डी बाई आदिवासी अब भी कराहल जनपद पंचायत की सदस्य हैं। गुड्डी बाई अपने परिवार को पालने के लिये एक छोटी सी दुकान चलाती हैं और खेती बाड़ी से जो भी कमाई होती है, उससे अपना जीवन यापन करती हैं। वे जनपद सदस्य हैं तो उन्हे 1500 रुपए मासिक मानदेय भी मिलता है। यह मानदेय ही उनके लिए राहत है। 



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