साध्वी प्रज्ञा ठाकुर: भाजपा में विरोध था, अब आरएसएस ने कमान संभाली | BHOPAL NEWS

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साध्वी प्रज्ञा ठाकुर: भाजपा में विरोध था, अब आरएसएस ने कमान संभाली | BHOPAL NEWS

भोपाल। मालेगांव ब्लास्ट की आरोपी साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को लोकसभा टिकट दिए जाने से भाजपा के भोपाल संगठन में असंतोष बरकरार है। प्रज्ञा सिंह भिंड मूल की छात्रनेता रहीं हैं। भोपाल के भाजपा नेता इस बार स्थानीय को टिकट मांग रहे थे। वो प्रज्ञा सिंह के प्रचार के तरीके से भी नाराज हैं। स्थिति की नजाकत को समझते हुए आरएसएस ने चुनाव प्रचार की कमान अपने हाथ में ले ली है। 

आरएसएस ने साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को शुक्रवार को संघ कार्यालय समिधा बुलाया। यहां सह क्षेत्रीय कार्यवाह हेमंत मुक्तिबोध, अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख अरुण कुमार, क्षेत्र प्रचार प्रमुख नरेंद्र जैन मौजूद रहे। उन्होंने प्रज्ञा ठाकुर से उनकी परेशानियों के बारें में विस्तार से जानकारी मांगी। स्पष्ट हुआ कि भोपाल के भाजपा नेता साध्वी का साथ नहीं दे रहे हैं। पिछले दिनों भाजपा कार्यालय में बुलाई गई बैठक में ज्यादातर भाजपा के नेता उपस्थि​त ही नहीं हुए थे। अत: आरएसएस ने अब चुनाव की कमान अपने हाथ में ले ली है। आगे की सारी रणनीति संघ के पदाधिकारी ही बनाएंगे। 

भारत माता की बेटी से भाजपाई क्यों नाराज हैं
दरअसल, भोपाल के भाजपा नेता इस बार स्थानीय व्यक्ति को टिकट दिए जाने पर एकजुट हो गए थे। इसी के चलते उन्होंने वीडी शर्मा का मुखर विरोध भी किया था। दिग्विजय सिंह के मैदान में आपने के बाद शिवराज सिंह चौहान, अमित शाह से मिले और साध्वी का नाम फाइनल हो गया। भाजपा नेताओं का कहना है कि साध्वी प्रज्ञा सिंह से ज्यादातर लोगों का परिचय ही नहीं है। उनकी अपनी एक टीम है। वो टीम स्थानीय भाजपा नेताओं को महत्व ही नहीं दे रही।

जिसका फोन नहीं उठाते थे, उससे मदद मांगने गए

मप्र के प्रभारी विनय सहस्त्रबुद्धे और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभात झा भोपाल में बैठकर भाजपा के भीतर हो रहे डैमेज कंट्रोल को संभाल रहे हैं। खासतौर पर भोपाल संसदीय सीट पर इनका ध्यान है। वे हाल ही में एक पूर्व विधायक के घर गए। जाने से पहले फोन पर कहा कि खाना खाएंगे। जब पहुंचे तो खाने के साथ नेताजी की मान-मनुहार भी की। साथ ही कहा कि भोपाल के चुनाव में जुटना है। पूर्व विधायक ने भी लगे हाथ जिक्र कर दिया कि पिछले कुछ सालों में तो पार्टी ने अलग-थलग ही कर रखा है।

भोपाल में नेताओं की कमी थी क्या

यहां के एक स्थानीय नेता का दर्द भी पिछले दिनों अपने खास लोगों के बीच फूट पड़ा। उनका कहना था कि भोपाल में वैसे ही क्या नेताओं की कमी थी, जो एक नया नेता दे दिया गया।