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MPTET-2: जो पेपर लीक हुआ था, वही आंसर की में भी है | MP NEWS

भोपाल। प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड एक बार फिर माफिया को राहत और उम्मीदवारों के साथ चीटिंग करता नजर आया।  माध्यमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा के विज्ञान विषय का पेपर यू-ट्यूब पर लीक हुआ था। आज उसकी आंसर की अपलोड कर दी गई है। लीक हुआ पेपर और आंसर की समान हैं। अब यह प्रमाणित करने की जरूरत नहीं कि शिक्षक पात्रता परीक्षा वर्ग-2 का पेपर माफिया द्वारा ही लीक किया गया था। पीईबी प्रबंधन इस मामले में जांच की बात तो करता रहा परंतु अब तक उसकी जांच लापता है। 

पीईबी की मंशा पर संदेह 

पीईबी प्रबंधन ने जांच की बात तो कही थी परंतु जांच शुरू नहीं की गई है। परीक्षा नियंत्रक डॉ. अशोक कुमार भदौरिया का कहना है कि पेपर लीक मामले की जांच चल रही है। परीक्षा खत्म होने के बाद ही सच्चाई का पता चल पाएगा क्योंकि एग्जाम बुकलेट और आंसर शीट तभी ओपन हो पाएगी आज आंसर शीट भी सामने आ गई है लेकिन पीईबी ने अब तक ना तो जांच अधिकारी का नाम बताया है और ना ही जांच के बिन्दु सार्वजनिक किए हैं। इतना ही नहीं पीईबी ने अब तक वायरल हुए स्क्रीनशॉट भी जांच प्रक्रिया के लिए जब्त नहीं किए हैं। अत: संदेह उत्पन्न होता है कि पीईबी में जांच चल नहीं रही है बल्कि माफिया को बच निकलने का और सबूत मिटाने का मौका देने के लिए टल रही है। 

सभी जवाबों को टिक-मार्क किया हुआ था

यू-ट्यूब पर सब्जेक्ट के करीब 16 प्रश्न लीक किए गए थे। इसमें स्क्रीन पर सभी सवालों के जवाबों को टिक-मार्क किया हुआ है, यानी सॉल्ड पेपर वायरल किया गया। एक्सपर्ट्स से जांच कराने पर पता चला कि सारे सवालों के जवाब भी सही हैं। इससे यह बात पुख्ता होती है कि पेपर 22 फरवरी के पहले ही लीक हुआ है। परीक्षा में शामिल हुए स्टूडेंट्स ने बताया कि सोशल मीडिया पर जो प्रश्न वायरल हुए हैं वो 22 फरवरी को दूसरे शिफ्ट में हुए पेपर में आए हैं। 150 नंबर के इस पेपर में 30 नंबर की हिंदी, 30 नंबर की अंग्रेजी, 30 नंबर का बाल विकास व 60 नंबर का विज्ञान का पेपर शामिल है। इसमें विज्ञान का पेपर ही मुश्किल, लेकिन ज्यादा स्कोरिंग वाला होता है। 

खामियाजा कमलनाथ सरकार का उठाना पड़ेगा

इस मामले में निष्पक्ष जांच की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। इसका खामियाजा कमलनाथ सरकार और कांग्रेस को उठाना पड़ेगा। शिवराज सिंह सरकार को गिराने में व्यापमं घोटाला का बड़ा हाथ था। परीक्षाओं में पारदर्शिता की मांग लगातार की जा रही है परंतु शिकायतों पर ना तो कोई कार्रवाई होती है और ना ही जांच। बस जांच कराने के बयान आते रहते हैं।