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ताई करता कुठे गेले मराठी संगठन...??

पिछले 30 सालों से अपने निर्विवाद राजनीतिक कैरियर और साख को बरकरार रखने वाली ,सदा विजयी होने वाली इन्दौर की "ताई" लोकसभा सांसद सुमित्रा महाजन को लेकर जो छिछालेदर भाजपा संगठन और पार्टी ने मचा रखी है उससे इन्दौर का हर नागरिक हैरान है. चाहे कांग्रेसी हो या भाजपाई, चाहे महाजन का विरोधी हो या समर्थक सारे लोग चाहे वह उनके काम करने या ना करने पर प्रश्न उठाते हो, दिखने ना दिखने को मुद्दा बनाते हो अथवा सहमत हो या नही हो.. सबको ताई से हो रहे इस व्यवहार से बुरा लग रहा है..

1989 से 2019 तक लगातार ना तो कोई हिचकिचाहट थी ना जीत हार मे कोई प्रश्न, जीत को लेकर तो इस बार भी कांग्रेंस आश्वस्त नही है कि ताई के सामने लोकल कोई दम नही भरेगा और ताई का एकतरफा वोट बैंक, उनका अपना समाज " मराठी समाज" पूरी तरह साथ है.. परन्तु पिछले 10 दिन में ताई के नाम पर राजनीति करने वाले,उनके सहयोग से बने संगठन, 29 मराठी संस्थाएं, ताई के नाम पर पहचाने जाने वाले मराठी नेता/ लोग सब चुप्पी साधकर बैठकर तमाशा देख रहे है. 1.5 लाख की वोट की ताकत वाला मराठी समाज आज पंगु की तरह चुप खडा है.

मैं तो कांग्रेंसी हूं और दम से कहता हूं कि मराठी समाज कांग्रेंसी मराठियों को जरा तवज्जो नही देता और वो सब 90% भाजपा के साथ हैं, माननीय राजेन्द्र धारकर से लेकर मोघे जी और तमाम पार्षदों के पद विगत 30 वर्षो से मराठी लोगो के पास ही रहे है... चूंकि होलकर राज होने से मराठी समाज शहर का सबसे सांस्कृतिक समाज माना जाता है और ताई के दिन ब दिन ताकतवर होते रहने से उनके मराठी समर्थको की / उपकृत समर्थकों की संख्या बहुतायत में है.. .और इस अवसर पर जब ताई को खुलकर समर्थकों की जरूरत है जो कैलाशजी के खेमे की तरह मैदान में जाकर दम से पार्टी के झंडाबरदारो को चेता सके, परन्तु सब गायब है..

ताई के चेहरे पर फैली खीज विचलित करने वाली है. शहर के सारे लोग देख रहे है कि किस तरह खुलेआम भाजपा के दो शीर्ष "चौकीदार" मनमानी पर उतरकर एक भद्र महिला की 35 वर्षो की राजनीतिक पारी के अंत पर उतारू है.. पूरी गरिमा को तार तार कर रहे है.

मराठी समाज के नेताओं, पार्षदों, समाज प्रमुखों, साधु संतो सभी से निवेदन है कि समाजहित में आवाज उठाएं...जिनको विगत 25 वर्षो से अपने यहां बुलाकर आप लोग गौरवान्वित होते रहे हो उन्हें खुलकर आपकी मदद की जरूरत है...शहर में हम मराठी कांग्रेसियों को तो आप कुछ नही मानते फिर भी समाज के नाते हमने अपना फर्ज निभा दिया..... ताई को जिस बेइज्जती का सामना करना पड रहा है और जो सवाल उठ रहे है यदि उन पर आपने आवाज नही उठाई तो यह मराठी समाज का नेतृत्व के अंत का सूचक है...
डां.संजय कामळे, indian national Congress.