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शराब तस्करी और तोड़-फोड़ के केस भी वापस ले रही है सरकार | MP NEWS

भोपाल। मध्यप्रदेश की कमलनाथ (KAMAL NATH ) सरकार ने भाजपा शासनकाल में दुर्भावनापूर्वक दर्ज किए गए राजनीतिक मामलों को वापस लेने का ऐलान किया था परंतु गाइड लाइन कुछ इस तरह से जारी की गई कि जिला स्तरीय कमेटी किसी भी प्रकार के मामलों को वापस लेने हेतु अनुशंसा कर रही है। सागर में शराब ​तस्करी ( Alcohol smuggling ) का केस वापस लिए जाने की अनुशंसा की गई है क्योंकि आरोपी व्यक्ति एक कांग्रेस नेता के रिश्तेदार का कर्मचारी है। इसके अलावा चुनाव के दौरान एक न्यूज चैनल के लाइव शो में हुई तोड़-फोड़ का मामला भी वापस लिया जा रहा है। 

सागर के पत्रकार श्री अभिषेक यादव ( Mr. Abhishek Yadav ) की रिपोर्ट के अनुसार रहली थाने में विस चुनाव-2018 की वोटिंग की पूर्व रात्रि को यहां के वार्ड नंबर 14 में स्थित एक गोडाउन से 8 पेटी देसी शराब जब्त हुई थी। इस मामले में रहली पुलिस ने गोडाउन के कर्मचारी तुलसीराम पटेल को आबकारी एक्ट की धारा 34(2) का आरोपी बनाया था। जानकारी के अनुसार लोक अभियोजन शाखा की जिला स्तरीय कमेटी के सदस्य कलेक्टर, एसपी और जिला अभियोजन अधिकारी ने इस मामले को वापसी योग्य मानते हुए संचालनालय, लोक अभियोजन मप्र को अपनी भेजी है। 

न्यूज चैनल के लाइव शो में तोड़-फोड़ का केस भी होगा वापस / News Channel case of sabotage in the live show will be back 

कमेटी ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मुकुल पुरोहित ( Mukul Purohit ), कार्यकारी अध्यक्ष राजकुमार पचौरी ( Rajkumar Pachauri ) पर दर्ज मामला भी वापस लेने की अनुशंंसा की है। इन दोनों पर बीते साल एक रीजनल न्यूज चैनल के लाइव शो में तोड़फोड़ और गाली-गलौज करने का केस दर्ज किया था। इसके अलावा कमेटी के समक्ष वापसी के लिए एक अन्य मामला भी रखा गया था लेकिन उसमें अजा वर्ग के व्यक्ति के साथ अपराध होने की स्थिति में वापस लेने की अनुशंसा नहीं की गई।

नई गाइड लाइन ने फ्री-हेंड दे दिया है / New guide lines given by Free-Hand

राजनैतिक, किसान आंदोलन के अलावा शराब तस्करी से जुड़े मामलों की वापसी को लेकर जिला अभियाेजन अधिकारी राजीव रूसिया का कहना है कि आपराधिक मामलों की वापसी को लेकर हाल ही में शासन से गाइडलाइन आई है। इसमें बताया गया है कि ऐसे सभी प्रकरण जिनमें कलेक्टर या शासन स्तर पर वापसी के लिए आवेदन आते हैं। उनमें अपराध की धारा, घटनाक्रम के नया या पुराना होने पर विचार नहीं किया जाए। इसलिए इन दो मामलों पर विचारण किया गया। रूसिया के अनुसार इन दोनों मामलों को अब राज्यस्तरीय कमेटी की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। वहां से मंजूर होने पर इसे संबंधित कोर्ट के ADPO या सरकारी वकील धारा 321 के प्रोफार्मा के जरिए वापसी के लिए संबंधित कोर्ट को पेश करेंगे। इसके बाद कोर्ट ये निर्णय लेगा कि केस वापस होगा या नहीं।

पहले किस तरह के केस वापस लिए जाते थे

कांग्रेस सरकार की गाइडलाइन से पहले पूर्ववर्ती सरकार ने भी केस वापस लिए हैं। लेकिन इसके लिए उन्होंने जो गाइडलाइन बना रखी थी, उसके लिए केस ऐसी धाराओं में दर्ज होना चाहिए, जिनमें तीन साल से अधिक की सजा का प्रावधान नहीं हो। इसके अलावा केस को कोर्ट में विचारण के लिए 5 साल हो गए हों।