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आपत्तिजनक टिप्पणी: कब अपराध होती है, कब नहीं, सिंधी समाज विरुद्ध MLA रामेश्वर केस से पता चलेगा | MP NEWS

भोपाल। किसी व्यक्ति या समाज के खिलाफ की गई आपत्तिजनक टिप्पणी (Offensive comments), कब अपराध के दायरे में आएगी और कब नहीं इसका फैसला सिंधी समाज विरुद्ध विधायक रामेश्वर शर्मा केस की जांच रिपोर्ट के बाद सामने आएगा। इन दिनों आपत्तिजनक टिप्पणियों को लेकर काफी बवाल होते हैं। हर आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद आपराधिक प्रकरण दर्ज करने के लिए आवेदन दिए जाते हैं। सवाल यह है कि क्या हर प्रकार की आपत्तिजनक टिप्पणी अपराध की श्रेणी में आती है। 

कितने तरह की होतीं हैं आपत्तिजनक टिप्पणियां

1. एक व्यक्ति एकांत में है, और वो किसी व्यक्ति, समाज या संगठन के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी कर रहा है। 
2. एक व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति के साथ एकांत में है और वो वो किसी व्यक्ति, समाज या संगठन के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी कर रहा है। 
3. एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति से फोन पर बात कर रहा है और वो किसी व्यक्ति, समाज या संगठन के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी कर रहा है। 
4. एक व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति से पर्सनल चैट कर रहा है और वो किसी व्यक्ति, समाज या संगठन के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी कर रहा है। 
5. एक व्यक्ति कई व्यक्तियों के समूह के बीच है और वो वो किसी व्यक्ति, समाज या संगठन के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी कर रहा है। 
6. एक व्यक्ति किसी सोशल मीडिया ग्रुप में जो कुछ व्यक्तियों के लिए आरक्षित है, में है और वो किसी व्यक्ति, समाज या संगठन के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी कर रहा है। 

क्या है सिंधी समाज विरुद्ध विधायक रामेश्वर शर्मा केस

विधानसभा चुनाव के दौरान सोशल मीडिया पर एक आडियो वायरल हुई। कहा गया कि यह आवाज भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा की है जो सिंधी समाज के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी कर रहे हैं। सिंधी समाज ने इसके प्रति नाराजगी जताई और विधायक ने स्पष्टीकरण भी दिया। इस दौरान पुलिस थाने में एक शिकायत की गई कि भाजपा विधायक के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाना चाहिए क्योंकि किसी समाज के प्रति आपत्तिजनक टिप्पणी करना अपराध है। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। कांग्रेस नेता मोहरसिंह उर्फ सोनू तोमर के बयान दर्ज हुए।

क्या आवाज की जांच जरूरी है

बैरागढ़ पुलिस ने पंचायत की शिकायत एवं ऑडियो क्लिब की पेन ड्राइव साइबर सेल को भेजी थी। साइबर सेल की जांच शुरू होने से पहले भाजपा के चुनाव प्रभारी एवं मप्र आवास संघ के पूर्व अध्यक्ष सुशील वासवानी ने थाने में आवेदन देकर कहा था कि आडियो में आवाज रामेश्वर की नहीं है हम खुद इसकी जांच करने की मांग करते हैं। रामेश्वर ने भी सार्वजनिक कार्यक्रम में कहा था कि आवाज उनकी नहीं है फिर भी यदि समाज को ठेस पहुंची है तो मैं माफी मांगता हूं। ऐसी स्थिति में आवाज की जांच जरूरी है लेकिन इससे पहले यह तय करना जरूरी है कि क्या यह घटनाक्रम अपराध की श्रेणी में आता है। आवाज यदि विधायक रामेश्वर शर्मा की प्रमाणित हो भी जाए तो क्या आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जा सकता है। 

उप संचालक अभियोजन का नोट क्या है

पुलिस ने मामले की जांच से पहले उप संचालक अभियोजन से राय ली थी। उप संचालक ने अपने प्रतिवेदन में कहा है कि सोनू तोमर और विधायक के बीच हुआ वार्तालाप सार्वजनिक मंच पर नहीं हुआ है इसलिए इसमें अपराध नहीं बनता। 

तो क्या ऑडियो वायरल करने वाले के खिलाफ अपराध बनता है

कांग्रेस नेता मोहर सिंह उर्फ सोनू तोमर  ने रविवार को थाने में बयान दिया कि बातचीत मेरे और रामेश्वर के बीच ही हुई है। रामेश्वर ने सिंधी समाज के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की तो मैंने बातचीत का ऑडियो वायरल किया। सवाल यह है कि ऐसी स्थिति में क्या ऑडियो वायरल करने वाले के खिलाफ अपराध बनता है। उसने एक व्यक्ति की निजता का हनन किया। एक समाज के प्रति आपत्तिजनक टिप्पणी को सार्वजनिक कर दिया जबकि वो इसके लिए अधिकृत नहीं किया गया था।