दीपक विस्पुते: RSS के नए चुनाव अभियान प्रभारी | MP NEWS

11 February 2019

भोपाल। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने मध्यप्रदेश में लोकसभा चुनाव की कमान दीपक विस्पुते (DEEPAK VISPUTE) को सौंप दी है। ये फैसला आरएसएस के सरकार्यवाह सुरेश भैयाजी जोशी ने लिया। दरअसल, यहां आरएसएस और भाजपा के बीच काफी तनातनी चल रही है। इतना ही नहीं आरएसएस के अंदर भी तनाव की स्थिति है। संघ इस बात से भी नाराज है कि भाजपा अब तक विधानसभा चुनाव के सदमें से बाहर नहीं आ पाई है। 2 महीने में भाजपा कमलनाथ सरकार को घेरने में पूरी तरह से बिफल रही है। 

आरएसएस, भाजपा से नाराज

पत्रकार श्री धनंजय प्रताप सिंह की रिपोर्ट के अनुसार आरएसएस भारतीय जनता पार्टी की सुस्त गतिविधियों से नाराज चल रहा है। इसकी कई वजह हैं। पहली वजह तो ये कि मोदी सरकार द्वारा सवर्ण वर्ग को दस फीसदी आरक्षण दिए जाने के मुद्दे को भाजपा जमीन तक पहुंचाने में विफल रही। सूत्रों का कहना है कि पूर्ववर्ती सरकार के अहम फैसलों में शामिल मीसाबंदी पेंशन रोकने का मामला हो या माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के खिलाफ सरकार द्वारा की जा रही विद्वेषपूर्ण कार्रवाई हो, पार्टी ने कोई ठोस विरोध नहीं किया। ऐसी कई वजहें हैं जिसके चलते लोकसभा चुनाव की तैयारी और नियंत्रण का काम अब क्षेत्र प्रचारक दीपक विस्पुते को सौंपा गया है।

विस्पुते के पास छत्तीसगढ़ का भी प्रभार है। उन्हें सरकार्यवाह भैयाजी जोशी का भरोसेमंद माना जाता है। वे भाजपा में प्रदेश प्रभारी डा विनय सहस्त्रबुद्धे के सीधे संपर्क में रहेंगे। विस्पुते ने कमान संभालते ही हारे और जीते विधायकों के साथ बातचीत भी शुरू कर दी है।

अरुण जैन ने संभाली थी विधानसभा चुनाव की कमान

इससे पहले तक भाजपा के साथ समन्वय और नियंत्रण की पूरी बागडोर पूर्व क्षेत्र प्रचारक अरुण जैन के हाथों में थी। जैन विधानसभा चुनाव तक सारा कामकाज देख रहे थे। कुछ महीनों पहले उन्हें राष्ट्रीय पदाधिकारी बनाकर भोपाल से मुख्यालय बदल दिया गया था। जैन को संघ में सह सरकार्यवाह सुरेश सोनी का नजदीकी माना जाता है।

रामलाल नहीं बिठा पा रहे समन्वय

संघ सूत्रों की मानें तो राष्ट्रीय संगठन महामंत्री रामलाल भी प्रदेश में धुरंधर नेताओं और संगठन के बीच समन्वय नहीं बिठा पा रहे हैं। सबसे अहम कड़ी संगठन मंत्रियों की है। कई संभागीय संगठन मंत्री प्रदेश संगठन से नाराज हैं। उनका कहना है कि स्थानीय स्तर पर पार्टी की परेशानियों को किससे साझा किया जाए। इसी कारण सह संगठन महामंत्री बनाकर अतुल राय को भोपाल बिठाया गया था। पर इसका कोई फायदा नहीं हुआ।



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