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बिजली चोरी के झूठे मामले वापस होंगे, गलत ELECTRICITY BILL विवाद के लिए समिति बनी: ऊर्जा मंत्री | MP NEWS

05 January 2019

भोपाल। ऊर्जा मंत्री श्री प्रियव्रत सिंह ने बताया है कि वचन-पत्र में उल्लेखित कृषि एवं घरेलू प्रयोजन के विद्युत संबंधी झूठे प्रकरणों को वापस लेने के संबंध में जरूरी कार्यवाही करनेMP के निर्देश विद्युत वितरण कम्पनी के प्रबंध संचालकों को दे दिये गये हैं। निर्देशों में कृषि एवं घरेलू कनेक्शन पर विद्युत अधिनियम-2003 की विभिन्न धाराओं में दर्ज लम्बित न्यायालयीन प्रकरणों की कम्पनी स्तर पर समीक्षा कर गलत/झूठे न्यायालयीन प्रकरणों को चिन्हित कर उन्हें वापस लेने की कार्यवाही सुनिश्चित करने को कहा गया है। की गई कार्यवाही से ऊर्जा विभाग को अवगत करवाने को भी कहा गया है।

गलत ELECTRICITY BILL विवाद के लिए समिति गठित

राज्य शासन के वचन-पत्र के परिपालन में प्रत्येक जिले में विद्युत वितरण कम्पनी के वितरण केन्द्र स्तर पर गलत देयकों के निराकरण के लिये समिति का गठन किया गया है। समिति में विद्युत वितरण कम्पनी के प्रबंधक (वितरण केन्द्र/जोन के प्रभारी कनिष्ठ/सहायक यंत्री) सदस्य, संयोजक होंगे। समिति में प्रभारी मंत्री द्वारा 6 अशासकीय सदस्य नामांकित किये जायेंगे। इनमें एक-एक जनपद पंचायत के सदस्य, नगरीय क्षेत्र (यदि है तो) के पार्षद, कृषि/व्यवसायिक उपभोक्ता, घरेलू उपभोक्ता और 2 महिला सदस्य होंगी।

समिति प्रत्येक माह के दूसरे मंगलवार को 12 बजे वितरण केन्द्र/जोन पर बैठक कर प्राप्त आवेदनों पर विचार कर अनुशंसा करेगी। इस दिन अवकाश होने पर समिति अगले कार्य-दिवस पर बैठक करेगी। बैठक का कोरम कम से कम तीन सदस्य का होगा।

समिति का कार्य-क्षेत्र तथा निराकरण प्रक्रिया

गलत देयकों के निराकरण संबंधी आवेदन प्राप्त होने पर विद्युत वितरण कम्पनी के प्रबंधक के माध्यम से इन्हें समिति के समक्ष रखा जायेगा। समिति की अनुशंसा के 3 दिन के भीतर सदस्य संयोजक द्वारा प्रकरण कम्पनी के उप महाप्रबंधक/कार्यपालन यंत्री को प्रस्तुत कर दिया जायेगा। विद्युत वितरण कम्पनी के डेलीगेशन ऑफ पॉवर अनुसार प्राधिकृत अधिकारी द्वारा आवश्यकतानुसार बिल सुधार की कार्यवाही 7 दिन के भीतर पूरी कर उपभोक्ता को सुधरा हुआ बिल जारी होगा और समिति को इसकी सूचना भी दी जायेगी। प्राधिकृत अधिकारी द्वारा की गयी कार्यवाही से समिति के संतुष्ट न होने पर मामला अधीक्षण अभियंता/महाप्रबंधक को भेजा जायेगा। अधीक्षण अभियंता/महाप्रबंधक का निर्णय अंतिम होगा।



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