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पति सहित ससुराल को जेल भिजवाया, तलाक लिया, अब चाहती है सब भूल जाएं, फिर से अपना लें | BHOPAL NEWS

08 January 2019

भोपाल। एक महिला ने अपने पति से झगड़ा किया। पति व उसके परिवार को जेल भिजवाया और तलाक भी लिया। अब वो चाहती है कि पति सारी पुरानी बातें भूलकर उसे फिर से पत्नी के रूप में अपना ले। मजेदार बात तो यह है कि इस संवेदनशील सामाजिक रिश्ते को फिर से बनाने के लिए वो सरकारी ऐजेंसी जिला सेवा विधिक प्राधिकरण की मदद ले रही है। प्राधिकरण ने भी पति को काउंसलिंग के लिए बुलाया है। 

मां, भाई और बहन का असली रूप दिखा तो पति का प्यार याद आ गया
अयोध्या नगर निवासी महिला ने आवेदन में बताया कि 14 फरवरी 2012 को उसकी शादी एक निजी कॉलेज में पढ़ाने वाले प्रोफेसर से हुई थी। जनवरी-2016 में उसने पति से तलाक ले लिया था। इसके बाद जब वो अपने रक्त संबंधी मां, भाई और बहन के साथ रहने आई तब उसे पता चला कि उसका पति कितना अच्छा था। पति उसे नियमित रूप से भरण-पोषण भत्ता भेजता है परंतु महिला का कहना है कि उसकी मां, भाई और बहन ने उसका भरण-पोषण भत्ता हड़प लेते हैं। तीनों ने उसका जीवन नर्क कर दिया है। उससे बहुत बड़ी गलती हो गई है। वह अपने पति के पास वापस जाना चाहती है। 

भाई ने पिटाई लगाई और घर से निकाल दिया तब आंख खुली
काउंसलर को महिला ने बताया कि वो खुद भी साॅफ्टवेयर इंजीनियर है। उसका आरोप है कि मायके वालों ने झगड़ा सुलझाने की जगह दोनों के बीच की खाई और बढ़ा दी। तलाक के बाद वह डिप्रेशन में चली गई। इसकी वजह से उसकी नौकरी छूट गई। उसने अपना जीवन भाई-बहन को समर्पित कर दिया और जमा पूंजी उनकी शादी में खर्च कर दी। भाई की शादी के बाद मां ने भी साथ देना बंद कर दिया। उसके बाद भाई, भाभी और मां ताने मारने लगे। हद तो तब हो गई जब भाई ने उसके साथ मारपीट की और घर से निकाल दिया, तब पता चला कि उसने तलाक लेकर गलती की। 

पति ने बोला: ये मेरी जिंदगी बर्बाद कर चुकी है, अब नहीं
काउंसलर नुरुनिसा ने बताया कि इस मामले में पति ने शादी करने से इंकार कर दिया है। उसका कहना है कि पत्नी ने 498 ए, घरेलू हिंसा, भरण-पोषण का केस दर्ज कराया था। इस वजह उसे समाज में अपमानित होना पड़ा। इधर, जिला विधिक प्राधिकरण के सचिव आशुतोष मिश्रा का इस मामले में कहना है कि तलाक के बाद दोनों की रि-मैरिज हो सकती है। पति और पत्नी दोनों ने शादी नहीं की है इसलिए दोनों री-मैरिज की काफी गुंजाइश है। काउंसलिंग से मामला सुलझ सकता है। 



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