LOKSABHA CHUNAV HINDI NEWS यहां सर्च करें





मप्र जन अभियान परिषद और माखनलाल यूनिवर्सिटी में बड़े बदलाव की तैयारी | MP NEWS

27 December 2018

भोपाल। 15 साल के शासन में भाजपा ने कई सरकारी संस्थाओं का भगवाकरण कर दिया था। अब ऐसी सभी संस्थाओं में बड़े स्तर पर बदलाव होंगे। सीएम कमलनाथ के भरोसेमंद अफसरों ने इस दिशा में काम करना शुरू कर दिया है। सबसे पहले मप्र जन अभियान परिषद और माखनलाल यूनिवर्सिटी निशाने पर आएंगी। कांग्रेस आरोप लगाती रही है कि दोनों ही संस्थाएं भाजपा के लिए काम करतीं थीं। 

बता दें कि कि म.प्र. जन अभियान परिषद् का पंजीयन म.प्र. सोसाइटी पंजीयन अधिनियम 1973 के अन्तर्गत दिनांक 04.07.1997 को पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह द्वारा किया गया था। लेकिन वो इसको एक्टिव नहीं कर पाए। 2001 में यह आरएसएस कार्यकर्ता और भाजपा नेता अनिल माधव दवे के हाथ में आ गई। श्री दवे ने इस संस्था का भरपूर उपयोग किया। हालात यह बने कि लोग आज भी मप्र जन अभियान परिषद को आरएसएस से संबद्ध संस्था मानते हैं। आज इस संस्था में 7 लाख वेतनभोगी कार्यकर्ता काम कर रहे हैं। ये कार्यकर्ता गांव से लेकर ब्लॉक स्तर तक उपस्थित थे। बताने की जरूरत नहीं कि संस्था के सभी प्रमुख पदों पर भाजपा और आरएसएस से जुड़े लोग बैठे हुए हैं। 

आचार संहिता से पहले 450 कर्मचारी नियमित किए
संविदा कर्मचारियों ने इस पर काफी बवाल मचाया था। 2018 में चुनाव आचार संहिता लागू होने के ठीक पहले सिंतबर के महीने में राज्य सरकार ने संस्था के करीब 450 कर्मचारियों की सेवा नियमित कर दी थी। इस संस्था के 7 अधिकारियों को क्लास 1 अधिकारी की सुविधाएं दी जा रहीं हैं जबकि 77 सदस्यों को क्लास 2 अधिकारी की सुविधाएं प्राप्त हैं। मासिक वेतन भी 45 हजार रुपए है। 

7 लाख कार्यकर्ताओं की फौज
बताया जाता है कि इस संस्था की करीब 35 हजार कमेटियां हैं और 7 हजार ग्राम अधिकारी और कार्यकर्ता राज्य के विभन्न स्थानों में मौजूद हैं। हर समिति में करीब 20 सदस्य हैं। इस तरह पूरे प्रदेश में करीब 7 लाख कार्यकर्ताओं की फौज मौजूद है। 

माखनलाल यूनिवर्सिटी
मध्यप्रदेश में भाजपा की सरकार बनने से पहले तक माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय केवल एक शैक्षणिक संस्थान हुआ करता था परंतु भाजपा के सरकार में आने के बाद माखनलाल यूनिवर्सिटी विचारधारा विशेष के विद्वानों का अड्डा बन गई। यहां भी हर प्रमुख पद पर भाजपा और आरएसएस से जुड़े हुए लोग बैठे हैं। हालात यह थे कि जिसने भी भाजपा का झंडा नहीं उठाया उसे माखनलाल यूनिवर्सिटी से विदा कर दिया गया। माखनलाल यूनिवर्सिटी का केंपस आरएसएस के विचार को प्रसारित करने का केंद्र बन चुका है। 



-----------

अपनी पसंदीदा श्रेणी के समाचार पढ़ने कृपया नीचे दिए गए श्रेणी के ​बटन पर क्लिक करें

;
Loading...

Suggested News

Popular News This Week

 
-->