प्रदेश में एक परिसर एक शाला लागू होना अव्यवहारिक, RTE का उल्लंघन | MP NEWS

03 October 2018

भोपाल। मप्र तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ के प्रांतीय उपाध्यक्ष कन्हैयालाल लक्षकार ने बताया कि एक परिसर एक शाला योजना के दायरे में आने वाली शालाओं में आरटीई के तहत प्राथमिक / माध्यमिक व उमावि शालाओं के संचालन का समय एक हो गया, जो अलग-अलग होना चाहिए। छात्र संख्या के मान से प्रावि में 150 व मावि में 100 छात्र-छात्राओं पर प्रधानाध्यापक पद स्वीकृत है। उमावि के अधिन होने पर इनका अस्तित्व ही समाप्त हो गया है। प्रावि के बच्चों का मावि/उमावि के साथ एक समय विभाग चक्र से शाला संचालन असहज अव्यवहारिक है। पीरियड का ठोका लगते ही छोटे बच्चे असहज होकर शोर मचाने लगते है। विकेंद्रीकरण से केंद्रीकरण की ओर गमन अव्यवहारिक व टकराव पैदा करेगा। पदीय संरचना के कारण मनमुटाव व वरिष्ठ कनिष्ठ के मान सम्मान में टकराव आम बात है। एक परिसर एक शाला तू-तू मैं-मैं को बढ़ावा देकर आपसी सौहार्द बिगाड़ने में अहम भूमिका अदा करेगा। इसका दुष्प्रभाव बच्चों की पढ़ाई पर होगा। यह सभी बिंदु आरटीई की विभिन्न धाराओं का उल्लंघन करते हैं। 

विद्यालयों में "सफाई कर्मचारी" न होने से बड़े बच्चे, छोटे बच्चों को दबाव से शाला सफाई को बाध्य कर सकते है; इस कारण रोजाना पालकों व शिक्षकों में तनाव की स्थिति निर्मित हो सकती है  ! वैसे भी शिक्षा विभाग में आजीवन  पदोन्नति नहीं होती है, जो नगण्य पदोन्नति हुई वह भी इस योजना की भेंट चढ़ गये । यह स्थिति शिक्षकों में आक्रोश व निराशा के भाव पैदा कर रहे है । इसका सीधा असर शिक्षकों की कार्यक्षमता पर पड़े बगैर नहीं रहेगा । शाला निधि व आकस्मिक निधि अलग-अलग आने से इसका समुचित उपयोग शाला संचालन में सही ढंग से होता रहा है। 

अब इस मद में कटौती कर अपर्याप्त राशि "ऊंट के मुंह में जीरा" साबित होगी । इससे शाला संचालन व रखरखाव व स्वच्छ भारत अभियान प्रभावित हुए बगैर नहीं रहेगा । इस योजना से संस्था प्रधान को मानसिक तनाव की संभावना बलवती होती है; अतः एक परिसर एक शाला अवधारणा वापस लिया जाना ही श्रेयस्कर होकर छात्र-शिक्षक, समाज व शासन हीत में होगा।  
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