SC/ST-ACT: गिरफ्तारी अनिवार्य या नहीं, पढ़िए विशेषज्ञों के बयान

22 September 2018

भोपाल। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निरोधक) अधिनियम, 1989 में हुए संशोधन के बाद पूरे देश में बहस छिड़ गई है। अनारक्षित जातियों के लोग इस एक्ट में तुरंत गिरफ्तारी के प्रावधान से नाराज हैं। आरोप है कि एक्ट का दुरुपयोग किया जाता है लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं कि फरियादियों से ज्यादा पुलिस इस एक्ट का दुरुपयोग करती है। शिकायत मिलते ही एफआईआर करती है और फिर गिरफ्तारी, जबकि एक्ट में गिरफ्तारी बाध्यकारी नहीं है। यह जांच अधिकारी के विवेक पर निर्भर करता है। 

जांच अधिकारी केस बंद भी कर सकता है: एसआर सिंह
सेवानिवृत न्यायाधीश एसआर सिंह कहते हैं कि जांच अधिकारी के पास पहले भी गिरफ्तारी का विवेकाधिकार था और अभी भी है। संशोधित कानून ये नहीं कहता कि एफआईआर दर्ज होने के बाद जांच अधिकारी गिरफ्तारी करने के लिए बाध्य है। अगर उसे लगता है कि एससी एसटी कानून में कोई संज्ञेय अपराध नहीं हुआ तो वह गिरफ्तारी नहीं करेगा कोर्ट में केस बंद करने के लिए फाइनल रिपोर्ट देगा।

किसी भी कानून में तुरंत गिरफ्तारी का प्रावधान नहीं है: रिटायर्ड जज एसआर सिंह
यह किसी कानून में नहीं कहा गया है कि तुरंत गिरफ्तार करो। कानून में संज्ञेय अपराध में तुरंत एफआईआर की बात है। एफआईआर के बाद जांच होती है और फिर गिरफ्तारी का नंबर आता है। गिरफ्तारी जांच का हिस्सा होती है। जांच अधिकारी को अगर अभियुक्त को लेकर कोई आशंका है तो वह गिरफ्तार कर सकता है। उनसे सहमति जताते हुए सुप्रीम कोर्ट वकील डीके गर्ग कहते हैं कि इस कानून को लेकर लोगों में तुरंत गिरफ्तारी का भ्रम है। जांच अधिकारी यह तय कर सकता है कि तुरंत गिरफ्तारी हो या न हो। अगर अभियुक्त के खिलाफ प्रथमदृष्टया केस बनता है तभी गिरफ्तारी होती है।

सीआरपीसी की धारा 41 कहती है जरूरत होने पर ही गिरफ्तारी की जाए: पूर्व जज प्रेमकुमार
शिवराज के बयान पर दिल्ली के पूर्व जज प्रेमकुमार कहते हैं कि दुरुपयोग होने और न होने के बीच बहुत बारीक लाइन है। सीआरपीसी की धारा 41 के प्रावधान कहते हैं कि जरूरी होने पर ही गिरफ्तारी की जाएगी। अगर जांच अधिकारी इन प्रावधानों को लागू करते हुए गिरफ्तारी नहीं करता तो उसे क्या कहा जाएगा। ऐसा करना एससी एसटी कानून की भावना के अनुरूप है कि नहीं क्योंकि इसमें अग्रिम जमानत की मनाही है। इन सवालों को स्पष्ट करने के लिए सरकार को स्पष्ट नियम और दिशानिर्देश बनाने होंगे। इसके बगैर दुरुपयोग न होने का बयान महज राजनैतिक होगा।

हमारे देश में गिरफ्तारी नाजायज की जाती है: वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा
गिरफ्तारी के बारे में पूर्व एएसजी और वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा का भी यही कहना है कि गिरफ्तारी जरूरी नहीं है। बिना गिरफ्तारी के भी एफआइआर से पहले और बाद में जांच हो सकती है। कई फैसले हैं जिनमें इस बारे में व्यवस्था तय है। उनका कहना है कि हमारे देश में गिरफ्तारी नाजायज की जाती है। जहां जरूरी नहीं है वहां भी गिरफ्तारी होती है चाहें बाद में जांच के दौरान ही व्यक्ति क्यों न बेगुनाह पाया जाए। धारा 41 के प्रावधानों में जरूरी होने पर ही गिरफ्तारी होनी चाहिए। मुख्यमंत्री के बयान कानूनन सही है।
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