सीएम शिवराज सिंह का भाषण शुरू होते ही लोग उठकर चले गए | MP NEWS

19 September 2018

भोपाल। खबर चौंकाने वाली है। साधना भाभी के प्रभाव वाले शहर विदिशा में सीएम शिवराज सिंह की सभा फ्लॉप हो गई। सीएम शिवराज सिंह का भाषण शुरू होते ही लोग उठकर जाने लगे और 10 मिनट के भीतर आधे से ज्यादा कुर्सियां खाली हो चुकीं थीं। अब यह जानने की कोशिश की जा रही है कि जो विदिशा भाजपा का गढ़ है, जिस विदिशा में शिवराज सिंह का नया घर है। उसी में उनकी सभा फ्लॉप कैसे हो गई। मंगलवार देर शाम मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान विदिशा में अटल बिहारी वाजपेई मेडिकल कॉलेज का उद्घाटन करने पहुंचे थे। 

विदिशा के पत्रकार श्री गोविंद सक्सेना ने इसकी पूरी जानकारी शेयर की है। उन्होंने लिखा है कि विदिशा में ये पहला मौका था जब CM शिवराज सिंह चौहान की सभा थी, शिवराज जी भाषण दे रहे थे और लगभग आधे से ज्यादा पंडाल खाली हो गया। दिखावे के तमाम इंतजामों के बावजूद कांग्रेसी CM को उन्ही के नगर में काले झंडे दिखाने में कामयाब हो गए। प्रशासन के आदेश पर भीड़ बढ़ाने ढोकर लाये गये स्कूली बच्चे अनमने ढंग से घण्टों बैठे रहे और सीएम का मात्र 10 मिनिट का भाषण पूरा होने से पहले ही पंडाल खाली कर गए। 

क्यों हुआ ऐसा। कौन है चुनाव के ऐनवक्त पर CM के नगर में उनकी इस फ़ज़ीहत का जिम्मेदार। प्रशासन के बेतुके फैसले या बीजेपी के बड़बोले नेताओ की हेंकड़ी। शिवराज जी की इस सभा को सफल बनाने करीब 8 रोज पहले अग्रवाल धर्मशाला में बीजेपी की बड़ी बैठक हुई थी, जिसमे संगठन मंत्री आशुतोष जी शामिल हुए थे। बैठक में जिले भर से करीब 1200 बीजेपी नेता शामिल हुए थे। सब ने बड़ी संख्या में लोगों को सभा में लाने का दम भरा था लेकिन क्या हुआ। कहाँ गई इन नेताओं की हेकड़ी, या ये माने की अब बीजेपी नेताओं की उनके ही क्षेत्र में सुनने वाले नही बचे, अगर कार्यकर्ता ही पूरे आ जाते तो पंडाल नही स्टेडियम छोटा पड़ जाता।

स्कूली बच्चे बुलाए थे, भाषण के बीच में ही छुट्टी हो गई 
लेकिन शायद प्रशासन इस स्थिति को भांप चूका था, तभी तमाम निजी और सरकारी स्कूल कालेज के स्टूडेंट्स को CM की सभा में पहुंचने का फरमान संस्थाओं को जारी किया गया। बसें लगा दी गई, क्योंकि शिक्षण संस्थाएं ही भीड़ बढ़ाने का सबसे सरल और अंतिम साधन है। भेड़ बकरियों की तरह जिधर हांक दो, उधर ही चले जायेंगे ये बच्चे। एक तरफ के पंडाल में सिर्फ स्टूडेंट्स ही मौजूद थे, घण्टों बैठे रहे, शेष दूसरी तरफ में आधे नेता, कार्यकर्ता, कर्मचारी, अधिकारी और मुट्ठी भर आम लोग। अचरज है कि प्रशासन को ये समझ नही आया की सुबह से अपने स्कूल कालेज के लिए घरों से निकले इन बच्चो,खासकर बेटियो का क्या होगा। वे घण्टों कैसे रुक सकेंगे। नतीजा ये हुआ की बिना सोचे समझे घेरकर लाये गये इन बच्चों में से अधिकांश CM का भाषण बीच में ही छोड़कर वापस आ गए। 

पुलिस ने अचानक रास्ता बदला​ फिर भी काले झंडे दिखा दिए गए 
जहाँ तक CM की सुरक्षा का सवाल है तो वह भी उन्ही के नगर में पूरी तरह फ़ेल नज़र आईं। तब विदिशा का इंटेलिजेंस सिस्टम कहाँ गया जब CM को कार्यक्रम स्थल से चंद मीटर दूर कांग्रेसियो ने काले झंडे दिखा दिए। कांग्रेसियो ने भी ये अचानक नही किया, सबको पता था आज ऐसा होने वाला है, लेकिन चिट फंड कम्पनी के एजेंटो, सपाक्स के लोगो के लिए दौड़ भाग करती पुलिस ये पता क्यों नही कर पाई की कांग्रेसी किस सुरंग में घुसे है। मज़े की बात तो ये है कि CM का रूट तय था, उसकी रिहर्सल भी हो चुकी थी, लेकिन ऐनवक्त पर उनको बायपास के रास्ते लाया गया, इस बदले हुए रास्ते की खबर काला झंडा दिखाने वालों को हो गई लेकिन पुलिस और इंटेलिजेंस को पता नही चल सका की कांग्रेस के लोग कहाँ है। बलिहारी है हमारे सिस्टम की। 

शिवराज ने 10 मिनिट में ही भारतमाता की जय बोल दी
यकीनन, शिवराज जी भी इस दौरे से सबक लेकर गए होंगे। वे भी अपसेट थे, तभी पहली बार उनका भाषण बिना किसी लाग लपेट के मात्र 10 मिनिट में खत्म हो गया। 40 मिनिट तक धाराप्रवाह बोलने वाले शिवराज ने 10 मिनिट में ही भारतमाता की जय बोल दी। दरअसल ये सभा नसीहत है शिवराज जी को कि वे अपने प्रशासन और टीम पर कितना भरोसा करें। सब लुटिया डुब्वाने पर उतारू हैं। फिर वे नेता भी आत्म चिन्तन करें की जिसे वे आंधी नही तूफान कहते हैं उनकी सभा में उनका क्या योगदान रहा। और प्रशासन भी सोचे की CM की उनके ही नगर में इतनी फ्लॉप सभा के कारण क्या थे। मंथन कर सफलता का अमृत निकलना बहुत जरूरी है, अन्यथा हालात तो बदल ही रहे हैं। होईहे वही जो राम रुचि राखा...
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