MP NEWS: अनूप मिश्रा का कद बढ़ा गई सपाक्स की चाय पार्टी

19 September 2018

भोपाल। एससी/एसटी एक्ट का विरोध कर रहे सवर्ण समाज का कोई चेहरा नहीं है। पूरे प्रदेश में कोई संगठन नहीं है जो इसका नेतृत्व कर रहा हो परंतु हजारों संगठन हैं जो इसमें भाग ले रहे हैं। श्री राजपूत करणी सेना एवं सपाक्स भी ऐसे ही संगठनों में से एक है। आपको याद होगा पिछले दिनों सपाक्स के पदाधिकारी सांसद अनूप मिश्रा का विरोध जताने उनके आवास पर गए थे। मिश्रा ने सबको अंदर बुलाया और चाय पिलाई। इस घटना से सपाक्स को फायदा हुआ या नहीं यह तो सपाक्स के भाग्यविधाता ही जानें परंतु अनूप मिश्रा का कद जरूर बढ़ गया है। भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री रामलाल ने अनूप मिश्रा ने लम्बी बात की और अब खबर आ रही है कि उन्हे भाजपा का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया जा सकता है। 

खबर आ रही है कि करीब एक महीने से प्रदेश में सवर्णों के बहिष्कार का सामना कर रही भाजपा को सवर्ण किसी भी कीमत पर इस मामले को निपटाना चाहती है। सवर्णों को मनाने के लिए और सपाक्स को साधने के लिए भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री रामलाल ने मंगलवार को भोपाल में अनूप मिश्रा से लंबी बातचीत की। पार्टी के उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि पार्टी सवर्ण विरोध को साधने के लिए अनूप मिश्रा को कार्यकारी अध्यक्ष बनाना चाहती है। अनूप मिश्रा ने भी मौके का फायदा उठाया और विधानसभा चुनाव की दावेदारी पेश कर दी। उन्होंने ग्वालियर पूर्व से लड़ने की इच्छा जता दी है। 

भाजपा में क्या स्थिति थी अनूप मिश्रा की
सपाक्स को चाय पिलाने से पहले अनूप मिश्रा पार्टी में हाशिए पर चल रहे थे। उनके संसदीय क्षेत्रों में होने वाले कार्यक्रमों में उन्हें दरकिनार किया जा रहा था। ग्वालियर में होने वाले राजनीतिक कार्यक्रमों से भी उन्हें दूर रखा गया। उन्हीं के क्षेत्र में उनकी अनदेखी की शिकायत पार्टी हाईकमान से करना पड़ी थी। 

समाज में क्या स्थिति है अनूप मिश्रा की
अनूप मिश्रा श्री अटल बिहारी वाजपेयी के भांजे हैं परंतु ब्राह्मण समाज को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। ब्राह्मण समाज में उनकी कोई अच्छी स्थिति नहीं है। सपाक्स को चाय पिलाने के बावजूद उनका विरोध कम नहीं हुआ है। समाज उनसे यह जानना चाहता है​ कि जब संसद में एससी/एसटी एक्ट में संशोधन किया जा रहा था तो वो चुप क्यों थे। 

खुद भाजपा ने ब्राह्मण नेताओं को स्वाहा कर दिया
भाजपा में अब ब्राह्मण नेताओं का टोटा हो गया है। दरअसल, पिछले 15 सालों में भाजपा के सारथियों ने ही मिलकर ब्राह्मण नेताओं को स्वाहा कर दिया। हर वो ब्राह्मण नेता जिसकी समाज में स्वीकार्यता थी, भाजपा में हाशिए पर डाल दिया गया। लक्ष्मीकांत शर्मा को तो जेल में भी डाल दिया गया। फिलहाल सरकार में छह ब्राह्मण मंत्री (गोपाल भार्गव, नरोत्तम मिश्रा, अर्चना चिटनिस, राजेंद्र शुक्ल, दीपक जोशी, संजय पाठक) हैं, लेकिन ब्राह्मण समाज का सर्वमान्य नेता कोई नहीं बन पाया। अब जबकि सवर्ण आंदोलन शुरू हो गया है तो भाजपा चाहती है कि उपलब्ध ब्राह्मणों में से ही किसी एक को समाज में सर्वस्वीकार्य करा दिया जाए। 
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