MLA हेमंत कटारे: बलात्कार मामले में फिर उलझ सकते हैं | MP NEWS

30 September 2018

भोपाल। ज्योतिरादित्य सिंधिया के आशीर्वाद से विधायक बने कांग्रेस नेता हेमंत कटारे के खिलाफ एक युवती के साथ बलात्कार का मामला दर्ज है। युवती ने हाईकोर्ट में हलफनामा दिया है कि उसने भाजपा नेता अरविंद भदौरिया के कहने पर झूठी शिकायत की थी। माना जा रहा था कि इस मामले में कटारे को राहत मिल जाएगी परंतु सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश के बाद यह मुश्किल लग रहा है। कटारे फिर उलझ सकते हैं। 

क्या कहा है सुप्रीम कोर्ट ने
जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस नवीन सिन्हा और जस्टिस केएम जोसेफ की बेंच ने कहा कि अगर रेप के आरोपी को पीड़िता द्वारा मेडिकल रिपोर्ट के अलावा अन्य किसी भी आधार पर क्लीन चिट भी दे दी जाती है, तब भी आरोपी के खिलाफ मुकदमा चलाया जा सकता है। कोर्ट ने ऐसे ही एक मामले में दोषी को 10 साल की सजा सुनाई जबकि रेप पीड़िता ने अपना बयान बदलते हुए कहा था कि उनके साथ बलात्कार नहीं हुआ। 

न्याय व्यवस्था का मजाक नहीं बनने देंगे
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा, 'क्रिमिनल ट्रायल का मकसद सच सामने लाना है। पूछताछ कैसी हो यह हर केस और उसके तथ्यों पर निर्भर करते है। किसी को निर्दोष मानने और पीड़िता के हक के बीच संतुलन जरूरी है। आरोपी या पीड़ित किसी को यह अनुमित नहीं है कि वह झूठ बोलकर क्रिमिनल ट्रायल को पलट दे और कोर्ट को मजाक का विषय बनाए। किसी को भी यह अनुमति नहीं होगी कि वह अपने बयान को पूरी तरह पलटते हुए मुकर जाए और क्रिमिनल ट्रायल या न्याय व्यवस्था का मजाक बनाए।

सुप्रीम कोर्ट ने माना- प्रभावित कर सकता है आरोपी 
सबूतों को देखने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा, 'पीड़िता का परिवार गरीब था और वह उसके कुल पांच भाई-बहन हैं। छह महीने बाद रेप पीड़िता ने अपना बयान बदल दिया। ऐसे में हमारा भी मानना है कि गुजरात हाई कोर्ट ने जो तर्क दिए हैं कि आरोपी ने कैसे भी करके पीड़िता को बयान पलटने पर मजबूर किया होगा, सही हैं।' बेंच ने आगे कहा, 'अगर कोई पीड़ित/पीड़िता न्यायिक प्रक्रिया को पलट देने के लिए अपना बयान बदल देता है तो कोर्ट चुप नहीं बैठेगा। सच सामने लाने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा। सबूत होने के बावजूद किसी के दबाव के चलते बयान बदलना स्वीकार्य नहीं होगा। 

हेमंत कटारे प्रकरण क्या है
विधायक हेमंत कटारे ने हनीट्रेप का आरोप लगाते हुए एक युवती को गिरफ्तार करवाया। 
युवती ने जेल से डीजीपी को शिकायत भेजी कि उसके साथ बलात्कार हुआ है। 
पुलिस ने अपने स्तर पर जांच करने के बाद विधायक के खिलाफ बलात्कार का मामला दर्ज कर लिया। 
बाद में युवती ने एक हलफनामा देकर अपनी शिकायत वापस लेने का निवेदन किया। 
कोर्ट ने हलफनामा की जांच के लिए पुलिस को आदेशित किया। 
जहांगीराबाद सीएसपी ने यह रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश कर दी है। 
सीएसपी सलीम खान द्वारा तीन भागों में पेश रिपोर्ट में से पहले में बताया गया कि हलफनामे में कही गई बात सही है या नहीं। 
दूसरे भाग में मामले की जांच की स्थिति के बारे में बताया गया है और तीसरी रिपोर्ट में यह बताया गया कि मजिस्ट्रेट के सामने युवती द्वारा दिए गए बयान और हलफनामे में की गई बात कि कितनी समानता या असमानता है। 

अब खतरा क्या है
हेमंत कटारे का खतरा अभी टला नहीं है। यदि युवती की शिकायत के बाद जांच के दौरान पुलिस ने पर्याप्त सबूत जमा कर लिए थे तो यह मामला जारी रह सकता है। युवती का हलफनामा कटारे के लिए राहतकारी नहीं रहेगा। इस मामले में भी युवती एक गरीब परिवार से है और हेमंत कटारे प्रभावित करने की स्थिति में है। वो ना केवल विधायक हैं बल्कि करोड़पति कारोबारी भी हैं। 

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