अजाक्स की तरफ जा रहे पिछड़ा वर्ग से सपाक्स की अपील | KHULA KHAT

21 September 2018

मैं डॉ. के.एल. साहू सामान्य, पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक कल्याण समाज संस्था (सपाक्स समाज संस्था) का प्रांतीय अध्यक्ष हॅू तथा मैं अन्य पिछड़ा वर्ग से आता हॅू। मैं अन्य पिछड़ा वर्ग के साथियों के समक्ष निम्न तथ्य लाना चाहता हॅू:-  

1. एट्रोसिटी एक्ट में दर्ज होने वाले 100 प्रकरणों में से 80 प्रकरण ओ.बी.सी. वर्ग के परिवारों के विरूद्ध ही दर्ज होते हैं और ओ.बी.सी. वर्ग को इस एक्ट के समाप्त होने के बिना कोई राहत नहीं मिल सकती है। क्या अजाक्स इस एक्ट को समाप्त करने के लिये तैयार है ?

2. सपाक्स समाज संस्था ओ.बी.सी. वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण दिये जाने के लिये संकल्पित है, किन्तु वर्तमान में एस.सी./एस.टी. वर्ग को 36 प्रतिशत का आरक्षण दिये जाने से यह संभव नहीं हो पा रहा है। सपाक्स की मांग है कि एस.सी./एस.टी. एवं ओ.बी.सी. को उनकी आबादी के प्रतिशत का आधा आरक्षण दिया जाये तथा शेष सामान्य वर्ग के गरीबों को मिले। क्या अजाक्स इस मांग को मानने के लिये तैयार है?

3. पदोन्नति में आरक्षण की व्यवस्था संविधान में सिर्फ अनु.जाति. /जनजाति को है और अन्य पिछड़ा वर्ग को यह कभी नहीं मिल सकता है। सरकारें कोई भी घोषणा करें या इस पर अमल की बात करें यह व्यवस्था न्यायालय के समक्ष कभी नहीं टिक सकेगी। 

4. मैं यह भी बताना चाहता हॅू कि ओ.बी.सी. वर्ग में हम आरक्षण के लिए रूपये 8 लाख तक की वार्षिक आय होने पर ही पात्र रहते हैं। पूरे परिवार की समस्त स्त्रोतों से वार्षिक आय रूपये 8.00 लाख से अधिक होने पर हम सामान्य वर्ग की गिनती में आते हैं। क्या अनु.जाति./जनजाति के लोग जो पीढ़ियों से आरक्षण लेकर आभिजात्य हो चुके हैं, क्रीमीलेयर के लिये तैयार है? 

5. हम सभी हिन्दू हैं और हमारे देवी/देवता भगवान श्रीराम, बजरंगबली, मॉ दुर्गा, श्री गणेश जी आदि भगवानों की मूर्तियों को तस्वीरों को सरे राह जलाते हैं, थूकते हैं और हमारी धार्मिक भावनाओं को आहत करते हैं। क्या यह किसी भी सभ्य समाज का लक्षण है। 

साथियों मैं आपको यह बताना चाहता हू कि सपाक्स समाज संस्था ने सामाजिक समरसता एवं जाति आधारित व्यवस्था को समाप्त करने की दिशा में एक जनआन्दोलन को खड़ा किया है। हमारी संस्था सामान्य पिछड़ा अल्संख्यक एवं एस.सी./एस.टी. वर्ग के गरीबों के हितों एवं उनके अधिकारों की रक्षा के लिये संघर्षरत है और आप सभी को भी उपरोक्त वास्तविकताओं को समझ कर आन्दोलन का साथ देना चाहिये। 
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