कांग्रेस: बेरोजगारों से ही बेरोजगारी दूर करने की अपेक्षा | EDITORIAL by Rakesh Dubey

02 September 2018

प्रदेश में आसन्न विधानसभा सभा चुनाव के मद्दे नजर दोनों ही ओर से पैतरेबाज़ी  शुरू हो गई है। कांग्रेस ने जो एक नया  पैतरा चला है उससे उसे चुनाव में कितनी मदद मिलेगी यह तो वक्त बतायेगा फ़िलहाल यह नई पैतरेबाजी कांग्रेस के लिए मुसीबत खड़े किये हुए है। यह भी कहा जा रहा है केन्द्रीय कांग्रेस कमेटी के 6 माह पुरानी योजना को अब अमल में लाया जा रहा है, जिससे  परिणाम कांग्रेस के पक्ष में आना तो दूर उसकी फजीहत के कारण जरूर बन रहे है। यह योजना है “प्रदेश में बेरोजगारों का सर्वेक्षण”।

चुनाव सर पर आते दिखते ही प्रदेश में बहुत सी सर्वे एजेंसियां सक्रिय हो गई है। एक ऐसी ही  एजेंसी  को कांग्रेस की ओर से प्रदेश की चुनिन्दा सीटों पर बेरोजगारों के सर्वे का काम केन्द्रीय समिति के 6 माह पूर्व दिए गये आदेश के विरुद्ध दिया गया है। वैसे तो यह नियम विरुद्ध है केन्द्रीय समिति ने इसे कार्यकर्ताओं के माध्यम से कराना था परन्तु एक पूर्व सांसद पुत्र को यह काम सिर्फ इसलिए सौंप दिया गया क्योंकि उनका दावा ऐसे सर्वे करने-कराने का था। इसकी शिकायत दिल्ली तक हुई पर प्रदेश नेतृत्व के तर्क ने केन्द्रीय समिति को अपने पूर्व का आदेश में संशोधन को मजबूर कर दिया। प्रदेश कांग्रेस समिति का तर्क था “चुनाव नजदीक हैं, इस कारण एजेंसी की मदद से” यह सर्वे हो। आदेश संशोधन के साथ एजेंसी का नाम भी सुझा दिया गया। अब  एजेंसी एक फार्म के जरिये वेतन भोगी  कर्मियों की मदद से चंद चुनाव क्षेत्रों में सक्रिय हैं। इस फार्म में बेरोजगारों के सर्वे के नाम पर जाति, धर्म, पारिवारिक पृष्ठभूमि, जैसे विषयों के जानकारी एकत्र की जा रही है। पता चला है कि इसी आधार पर कांग्रेस  भाजपा से दो-दो हाथ करेगी। सर्वे करने वालों से स्थानीय नेता भी अपना नाम और काम  आगे करने की अपेक्षा रखे  हुए हैं। ऐसे में सर्वे दल के लोगों के जो भुगतना पड़ रहा है, वह प्रदेश कांग्रेस की “पंच गुटीय एकता” की पोल खोलने के लिए पर्याप्त है। यहाँ भी कोई किसी से कम  रहने को तैयार नहीं। हर गुट प्रयास सर्वे के माध्यम से अपने गुट के नेता का प्रचार और अपने गुट के व्यक्ति का नाम आगे कराने में सर्वेयरों का उपयोग और दूसरे गुट की शिकायत और निंदा कराने में हो रहा है।

ताज़ा बानगी सीहोर जिले की है। एक गाँव, उसका एक मोहल्ला, कांग्रेस के तीन गुट एक सर्वे, जिसका कोई नतीजा नहीं और 20 शिकायतें। यह आंकड़ा उन्ही सर्वेयर से प्राप्त है जिन्हें तयशुदा  मानदेय सिर्फ इस कारण नहीं मिला कि उनकी नियुक्ति जिस गुट ने कि  वह अब अप्रभावी है। सर्वेयरों से जनता द्वारा सवाल के जवाब में जो सवाल किये जा रहे हैं वे भी कम रोचक नहीं है। मिलने वाले सुझाव उससे ज्यादा रोचक। जैसे किसी का सुझाव राहुल गाँधी का तुरंत विवाह है तो किसी की अपेक्षा ज्योतिरादित्य सिंधिया  से गाँव में पैदल चलने की है। बेरोजगारों से ही  बेरोजगारी दूर करने की अपेक्षा से ज्यादा कुछ निकलता नहीं दिख रहा है, अभी तो। आगे कमल नाथ जानें।
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श्री राकेश दुबे वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं।
संपर्क  9425022703        
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