शिवराज जी, मुख्यमंत्री की कोई जाति नहीं होती: ज्योतिरादित्य सिंधिया | MP ELECTION NEWS

29 July 2018

इंदौर। ईसीसी के चेयरमैन एवं सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सीएम शिवराज सिंह के उस आरोप का जवाब दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि ​मैं पिछड़ा वर्ग से हूं, इसलिए राजा-महाराजा मुझ पर आरोप लगातेे हैं। मुख्यमंत्री के इस बयान की प्रदेश के बुद्धिजीवि वर्ग ने काफी निंदा की है। इधर सिंधिया ने भी इस बयान पर प्रतिक्रिया दर्ज कराई है। सिंधिया ने कहा: शिवराज जी सुन ले आप पिछड़े नहीं हैं, आप दलित नहीं हैं, आप मुख्यमंत्री हैं, इस प्रदेश के...और मुख्यमंत्री की कोई जाति नहीं होती। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि आजादी के बाद राजा-महाराजा का दौर समाप्त हो गया है। मैं सिर्फ ज्योतिरादित्य सिंधिया हूं। मेरे कार्य के आधार पर लोग तय करें। 

जन आशीर्वाद नहीं, क्षमावाणी यात्रा निकालनी चाहिए: सिंधिया

मुख्यमंत्री की जन आशीर्वाद यात्रा पर चुटकी ली। सिंधिया ने कहा कि प्रदेश में महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं, बच्चियों से रेप हो रहे हैं, किसान परेशान है, भ्रष्टाचार चरम पर है, एेसे में मुख्यमंत्री को जन आशीर्वाद नहीं, क्षमावाणी यात्रा निकलनी चाहिए। राहुल के संसद में आंख मारने वाले सवाल पर कहा कि विपक्षी जबरन इसे मुद्दा बना रहे हैं। देश-प्रदेश में कई मुद्दे हैं, इन पर चिंता करने की बजाय हम आंख मारने के मुद्दे पर अटके हैं।

बेटियों के बलात्कार हो रहे हैं, CM हालचाल तक नहीं पूछते: सिंधिया

सिंधिया ने कहा कि प्रदेश की हालत खराब है। आए दिन बलात्कार की घटनाएं हो रही हैं, किसान परेशान है, भ्रष्टाचार तो बड़े स्तर पर हो रहा है। ऐसे में सीएम को जन आशीर्वाद नहीं क्षमावाणी यात्रा निकालनी चाहिए। सिंधिया ने सवाल किया कि मासूमों के साथ बलात्कार हो रहे हैं, क्या ये है बेटी बचाओ अभियान। अब तो भाजपा के विधायकों से बच्चियों को बचाना होगा। एक विधायक मंदसौर रेप में एमवाय पहुंचे सांसद को पीड़ित परिवार से धन्यवाद दिलवा रहे हैं। जबकि एक भी पीड़ित परिवार से मुख्यमंत्री मिलने नहीं गए।

जनता त्राहि-त्राहि कर रही है, इनके लिए आंख मारना मुद्दा हो गया: सिंधिया

सिंधिया ने कहा कि किसान कर्ज के बोझ तले दबकर जान देने को मजबूर है। पेट्रोल-डीजल के भावा आसमान छू रहे हैं। बेरोजगार के पास कोई काम नहीं है, लेकिन प्रजातंत्र में किसी के आंख मारने को मुद्दा बनाया जा रहा है, इसे विपक्षी जबरन मुद्दा बना रहे हैं। पहले तो मुख्यमंत्री प्रदेश के हित की बात करते हुए धरने पर बैठने दिल्ली चले जाते थे, मोदी सरकार आने के बाद अब क्या हुआ। ये कौन सा अर्थशास्त्र है। मोदीजी कहते थे कि 15 लाख आपके खाते में आएंगे, पर 15 लाख करोड़ तो कुछ लोग आमजन के खाते से ले उड़े।
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