लालू यादव फैमिली का 750 करोड़ वाला शॉपिंग मॉल सीज

Wednesday, June 13, 2018

पटना। लालू यादव के जेल जाने के बाद भी लालू परिवार के खिलाफ कार्रवाईयां कम नहीं हुईं हैं। प्रर्वतन निदेशालय (ईडी) ने लालू यादव के परिवार के उस निर्माणाधान मॉल को सीज कर दिया जिसकी लागत 750 करोड़ रुपए बताई जा रही है और यह निर्माण की शुरूआत से ही सुर्खियों में था। यह मॉल पटना के बेली रोड पर डिलाइट मार्केटिंग कंपनी बनवा रही है। साथ ही इसे बिहार का सबसे बड़ा मॉल भी कहा जाता है। पिछले साल उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने इसके निर्माण पर सवाल उठाए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि रेलवे टेंडर घोटाले के एवज में लालू यादव और उनके परिवार ने 2 एकड़ जमीन हासिल की थी। इसी पर मॉल बनाया जा रहा है। घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग को लेकर एजेंसियां जांच कर रही हैं।

मॉल के लिए रेलवे टेंडर घोटाले से जमीन मिली: भाजपा
सुशील मोदी के मुताबिक, 2006 में रेल मंत्री रहते हुए लालू ने रांची और पुरी में रेलवे के दो होटल गलत तरीके से कारोबारी हर्ष कोचर को दिए थे। बदले में पटना में 200 करोड़ रुपए कीमत की 2 एकड़ से ज्यादा जमीन बेनामी तरीके से डिलाइट मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड के नाम कराई। तब कंपनी का मालिकाना हक राजद सांसद प्रेम चंद्र गुप्ता की पत्नी के पास था। इसी जमीन पर पटना में मॉल बनाया जा रहा है। उन्होंने मिट्टी घोटाले का आरोप लगाया। मोदी ने दावा किया कि मॉल बनाने के लिए खोदी गई मिट्टी गलत तरीके से संजय गांधी जैविक उद्यान (चिड़ियाघर) को 90 लाख में बेची गई। इसके लिए सौंदर्यीकरण की गैरजरूरी योजना तैयार हुई।

लालू के परिवार तक कैसे पहुंची जमीन?
सीबीआई ने कहा था कि 2014 में लालू के बेटे तेजप्रताप, तेजस्वी, बेटी चंदा और रागिनी को डिलाइट मार्केटिंग में डायरेक्टर बनाया गया। नवंबर, 2016 को कंपनी का नाम बदलकर लारा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड कर दिया गया। ला मतलब लालू, रा यानी राबड़ी। प्रोजेक्ट का नाम बदलते ही जमीन पर लालू के परिवार का मालिकाना हक हो गया। 14 फरवरी, 2017 से राबड़ी देवी, तेज प्रताप और तेजस्वी को इसका डायरेक्टर बनाया गया था।

घोटाले के खुलासे पर शुरू हुई थी जांच
जुलाई, 2017 में सीबीआई ने लालू के आवास पर छापा मारा। जांच एजेंसी ने पूर्व रेलमंत्री लालू यादव, राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी, मेसर्स लारा प्रोजेक्ट्स, विजय कोचर, विनय कोचरऔर आईआरसीटीसी के पूर्व मैनेजिंग डायरेक्टर के खिलाफ केस दर्ज किया था। इसके बाद 27 जुलाई को प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत केस दर्ज कर लालू परिवार की बेनामी संपत्तियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की थी।

आगे क्या: जमीन हासिल करने के लिए देने होंगे सबूत
प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई के बाद अब मॉल की जमीन हासिल करने के लिए डिलाइट मार्केटिंग को कोर्ट का दरवाजा खटखटाना होगा। इस बात के सबूत देने होंगे कि उन्हें यह प्रापर्टी कैसे मिली या किससे इसे खरीदा था।
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