कर्नाटक: अमित शाह के दवाब में हुआ सारा ड्रामा, चंद्रशेखर के पास था अचूक प्लान

20 May 2018

नई दिल्ली। भाजपा के रणनीतिकार अल्पमत सरकार के पक्ष में नहीं थे लेकिन दिल्ली में शीर्ष नेतृत्व के अड़ने पर येद्दियुरप्पा ने शपथ ली। सूत्रों के मुताबिक चुनाव में अहम भूमिका में रहे राज्यसभा सदस्य राजीव चंद्रशेखर का मत था कि बहुमत का जुगाड़ जल्दी संभव नहीं है। पहले कांग्रेस-जेडीएस को सरकार बनाने दें। फ्लोर टेस्ट के लिए राज्यपाल उन्हें 10-15 दिन देंगे। उस दौरान विधायक तोड़कर कांग्रेस-जेडीएस सरकार गिरा सकते हैं। नहीं तो 5-6 माह में गठबंधन सरकार में विवाद जरूर होंगे। ऐसे में लोकसभा चुनाव के करीब कुमारस्वामी की सरकार गिरा सकते हैं। लेकिन शीर्ष नेतृत्व सरकार बनाना चाहता था। विधायक जुटाने का काम येदियुरप्पा के विरोधी सोमशेखर रेड्‌डी को सौंपा लेकिन विपक्ष की घेराबंदी और सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने सारी रणनीति पर पानी फेर दिया। और तो और तुमकुर मठ के धर्मगुरु शिवकुमार स्वामी भी लिंगायत विधायकों से संपर्क नहीं कर पाए थे।

कांग्रेस ने 4 टेप जारी किए, डेढ़ बजे हार तय हो गई थी

कर्नाटक में 55 घंटे के मुख्यमंत्री येद्दियुरप्पा को शनिवार शाम शक्ति परीक्षण से पहले ही इस्तीफा देना पड़ा। राज्यपाल ने येदियुरप्पा को बहुमत साबित करने के लिए 15 दिन दिए थे लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने मोहलत घटाकर एक दिन कर दी थी। कोर्ट ने शनिवार सुबह फ्लोर टेस्ट के सीधे प्रसारण का भी आदेश दिया। इसके बाद 4 घंटे में घटनाक्रम तेजी से बदला। 101% जीत का दावा करने वाली भाजपा बैकफुट पर आ गई। कांग्रेस ने 4 टेप जारी कर भाजपा पर विधायक खरीदने के आरोप लगाए। कांग्रेस के 3 लापता विधायक भी लौट आए। डेढ़ बजे तक भाजपा को हार का अाभास हो गया। इसके बाद भावुक भाषण के साथ येदियुरप्पा ने इस्तीफा दे दिया।


22 साल बाद किरदार बदले, कहानी वही;

104 विधायकों वाली सबसे बड़ी पार्टी भाजपा के येदियुरप्पा को बहुमत नहीं जुटा पाने के कारण इस्तीफा देना पड़ा है। अब देवेगौड़ा के बेटे और तीसरे नंबर पर रहे 37 विधायकों वाले कुमारस्वामी सीएम बनेंगे। उन्हें दूसरे नंबर पर रही कांग्रेस के 78 विधायकों का समर्थन हासिल है। 22 साल बाद वही पुरानी कहानी दोहराई जा रही है। बस किरदार और स्थान बदल गया है। तब दिल्ली की संसद में अटल बिहारी और देवगोड़ा थे। 1996 में वाजपेयी को 13 दिन पीएम रहने के बाद 1 जून को इस्तीफा देना पड़ा। भाजपा 161 सांसदों के साथ सबसे बड़ी पार्टी थी। 144 सांसदों वाली दूसरी सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस के समर्थन से 44 सांसदों वाले देवेगौड़ा प्रधानमंत्री बने थे। 

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