यूनिवर्सिटी, उत्तर पुस्तिका की प्रति देने से इंकार नहीं कर सकती: सूचना आयोग | EDEUCATION NEWS

Wednesday, April 4, 2018

भोपाल। मप्र राज्य सूचना आयोग ने परीक्षार्थी को उसकी उत्तर पुस्तिका की प्रमाणित प्रति प्रदाय करने से इंकार करने के विधि विरुद्ध कृत्य के लिए विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन के कुलपति व कुलसचिव को जमकर फटकार लगाते हुए आदेष दिया है कि वे 7 दिन में अपीलार्थी को उसकी उत्तर पुस्तिका की प्रमाणित प्रति निःशुल्क प्रदाय कर 28 अप्रेल तक आयोग के समक्ष सप्रमाण पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत करना सुनिष्चित करें अन्यथा स्थिति में उनके विरुद्ध सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 20 (1) व 20 (2) के अंतर्गत दंडात्मक प्रावधान आकर्षित होंगे।

अपीलार्थी कु0 तितिक्षा शुक्ला की अपील मंजूर करते हुए राज्य सूचना आयुक्त आत्मदीप ने अपने आदेश में कहा है कि सूचना का अधिकार अधिनियम के प्रावधानानुसार मूल्यांकित उत्तर पुस्तिका परीक्षक की राय का दस्तावेज है जो धारा 2 के तहत ‘सूचना’ की परिभाषा के अंतर्गत आता है। नागरिकों को लोक प्राधिकारी के नियंत्रण या अधिकार में रखी ऐसी सभी सूचनाओं को पाने का अधिकार है। केन्द्रीय सूचना आयोग व विभिन्न राज्य सूचना आयोगों द्वारा पारित निर्णयों में भी अपनी उत्तरपुस्तिका की प्रमाणित प्रति प्राप्त करने के परीक्षार्थी के वैधानिक अधिकार की पुष्टि की जा चुकी हैं। 

परीक्षा आयोजित करने वाली सभी संस्थाएं दायरे में
सर्वोच्च न्यायालय द्वारा भी केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा मण्डल बनाम आदित्य बंदोपाध्याय मामले में सुस्पष्ट आदेश पारित किया जा चुका है कि परीक्षार्थी को अपनी मूल्यांकित उत्तरपुस्तिका की प्रमाणित प्रति प्राप्त करने का वैधानिक अधिकार है। उत्तरपुस्तिकाओं में दी गई सूचनाओं के प्रकटन से प्रतिलिप्याधिकार का भी उल्लंघन नहीं होता है। अतः परीक्षा लेने वाले निकायों को सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 9 की छूट प्राप्त नहीं होगी।

यूनिवर्सिटी ने अपना नियम बना लिया था
सूचना आयुक्त ने विश्वविद्यालय की इस दलील को विधि विरुद्ध करार दिया कि विवि समन्वय समिति द्वारा मंजूर स्थायी समिति की अनुशंसा अनुसार विवि व महाविद्यालय के विधार्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं की प्रति नहीं दी जा सकती है क्योंकि इसके कारण वैधानिक कठिनाईयां बढ़ने की आशंका है। अतः सूचना के अधिकार के तहत उत्तर पुस्तिका की प्रति नहीं दी जा सकती है, केवल उसका अवलोकन कराया जा सकता है। 

RTI ACT सर्वोपरि
इस संबंध में अपीलीय अधिकारी/कुलपति व लोक सूचना अधिकारी/कुलसचिव के निर्णय खारिज करते हुए आयुक्त आत्मदीप ने फैसले में कहा- अधिनियम की धारा 22 के अनुसार सूचना का अधिकार अधिनियम के प्रावधानों का सर्वोपरि (ओवर राईडिंग) प्रभाव रहेगा। इसका आशय यह है कि यदि अन्य किसी कानून/नियम/प्रावधान में सूचना का अधिकार अधिनियम के प्रावधानों से विसंगति रखने वाला कोई प्रावधान है तो ऐसा असंगत प्रावधान मान्य नहीं होगा और उसके स्थान पर सूचना का अधिकार अधिनियम के प्रावधान मान्य होंगे। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा भी स्पष्ट किया गया है कि सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 22 के अनुसार, अधिनियम के प्रावधान सर्वोपरि होने से, परीक्षा लेने वाले निकाय इस बात से आबद्ध हैं कि वे अपने नियमों/विनियमों में विपरीत प्रावधान होने के बावजूद, परीक्षार्थी को उत्तरपुस्तिका का निरीक्षण करने दें और चाहे जाने पर उसकी प्रति प्रदान करें। 

अपील की सुनवाई नहीं की थी
अपीलार्थी के सूचना के आवेदन का नियत अवधि में निराकरण न करने, अपीलार्थी को प्रथम व द्वितीय अपील संबंधी जरूरी सूचना न देने तथा प्रथम अपील की सुनवाई में अपीलार्थी के प्रतिनिधि को न सुनने पर भी नाराजगी जताते हुए आयोग ने कुलपति व कुलसचिव कोे आइंदा ऐसी वैधानिक त्रुटि न करने की चेतावनी दी है। 

क्या है मामला
कु0 तितिक्षा शुक्ला ने विवि से मेनेजमेंट एकाउंटिंग विषय के प्रश्नपत्र की स्वयं की उत्तर पुस्तिका की प्रति चाही थी जिसे देने से कुलसचिव ने यह कह कर इंकार कर दिया कि सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत उत्तर पुस्तिका की प्रति देने का प्रावधान नहीं है। कुलपति ने भी इसी आधार पर प्रथम अपील खारिज कर दी। आयोग ने कुलपति व कुलसचिव के आदेशों को निरस्त कर अपीलार्थी को उत्तर पुस्तिका की प्रति देने का आदेश पारित कर दिया। 

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