INDORE की निजी संस्थाओं में महिला कर्मचारी का यौन उत्पीड़न सबसे ज्यादा | CRIME NEWS

Friday, March 9, 2018

इंदौर। निजी संस्थानों में काम करने वाली महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। यहां उनका SEXUAL HARASSMENT हो रहा है। यह खुलासा वी केयर फॉर यू एवं सिटीजन कॉप पर आई शिकायतों में हुआ है। आंकड़ों के मुताबिक एक साल में दर्ज शिकायतों में 60 प्रतिशत यौन उत्पीड़न की हैं। मामले स्कूल-कॉलेज और ऑफिस के हैं। इधर आरटीआई में यह खुलासा भी हुआ है कि संस्थान सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना कर रहे हैं। कोर्ट ने उन सभी संस्थानों में महिला लैंगिक उत्पीड़न समिति के गठन के निर्देश दिए थे जिनमें 10 या उससे अधिक कर्मचारी हैं। लेकिन शहर के मात्र 98 संस्थानों ने इसका पालन किया।

एएसपी क्राइम अमरेंद्र सिंह के मुताबिक वर्ष 2016-17 के बीच यौन उत्पीड़न की 1699 शिकायतें मिली हैं। इनमें 60 प्रतिशत निजी संस्थानों में काम करने वाली युवतियों की हैं। वहीं जनवरी-फरवरी में 276 शिकायतें आई हैं। इनमें 68 ऑफिस में काम करने वाली महिलाओं और 85 शिकायतें छात्राओं की है। जबकि 216 महिला संबंधी अन्य शिकायतें हैं।

समिति नहीं बनाने पर लगता है जुर्माना
जिला महिला सशक्तीकरण विभाग के मुताबिक निजी संस्थानों को महिलाओं का लैंगिक उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध एवं प्रतितोषण) अधिनियम 2013 के अंतर्गत वर्ष 2014 से 2017 के बीच आंतरिक परिवाद समिति का गठन करना अनिवार्य है।

कोई भी संस्थान में वहां कार्यरत महिला का लैंगिक उत्पीड़न नहीं किया जा सकता है। लैंगिक हिंसा मौखिक, शाब्दिक, लिखित किसी भी रूप में हो सकती है। पहली शिकायत आने पर 50 हजार रुपए तक जुर्माना, दूसरी पर एक लाख रुपए जुर्माने के साथ लाइसेंस निरस्ती की कार्रवाई होती है। अब तक सिर्फ एक निजी अस्पातल के खिलाफ शिकायत मिली थी। विभाग ने प्रबंधन और जिम्मेदार के खिलाफ कार्रवाई की। केस कोर्ट में विचाराधीन है।

यह है कानून
यौन हिंसा भारतीय संविधान के खंड 14 व 15 व 21 का हनन है। किसी भी व्यवसाय व रोजगार के अधिकार में यौन हिंसा मुक्त माहौल में काम करने का अधिकार भी शामिल है। एडवोकेट अजय पाल द्वारा आरटीई के तहत ली गई जानकारी के अनुसार सिर्फ 98 संस्थाओं ने ही अपने कार्यस्थलों पर समिति का गठन किया है।

यह है यौन उत्पीड़न
शारीरिक स्पर्श, पहल व पेशकश
यौन स्वीकृति के लिए आग्रह, प्रस्ताव या मांग करना
लैंगिक आभासी टिप्पणियां करना या अश्लील तस्वीरें, साइट या साहित्य दिखाना
लैंगिक प्रकृति का कोई अन्य अवांछनीय शारीरिक, शाब्दिक या गैर शाब्दिक व्यवहार करना

आंतरिक समिति के गठन के नियम
इस कानून के मुताबिक हर नियोक्ता (संस्था) को आंतरिक शिकायत समिति का गठन करना अनिवार्य है। जिससे कार्यस्थल में होने वाली लैंगिक उत्पीड़न की शिकायत का निवारण हो सके। समिति का कार्यकाल तीन साल का होगा। समिति की अध्यक्ष महिला होगी एवं अधिक से अधिक सदस्य महिलाएं होंगी।

यहां समिति होना अनिवार्य
सरकारी विभाग, स्वयंसेवी संस्थाएं, सरकारी संस्था, निजी क्षेत्र-कंपनी, अस्पताल, नर्सिंग होम, खेल विभाग, कॉम्प्लेक्स, शिक्षण संस्थान।

सभी से समिति की जानकारी मांगी है
अब तक 200 से ज्यादा संस्थानों से पत्राचार और ईमेल के जरिये समिति संबंधी जानकारी मांगी जा चुकी है। लेकिन कुछ ने ही जानकारी दी है। वर्कशॉप सहित अन्य प्रचार-प्रसार के माध्मय से समिति बनाने के लिए संस्थान से संपर्क करते हैं। हमारे पास कोई पीड़िता आएगी तो कार्रवाई की जाएगी। सभी सरकारी विभागों में समिति बनी हुई है। 
राकेश वानखेड़े, जिला महिला सशक्तिकरण अधिकारी

एडीजी और डीआईजी ऑफिस में समिति बनी हुई है। रेंज के कुछ जिलों में नई समिति बनी है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश हैं हर संस्थान में समिति होना चाहिए। धार और इंदौर में कुछ महिला पुलिसकर्मियों ने शिकायत की थी। जिनकी जांच की जा रही है। कार्यालयों में महिला सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाती है। 
अजय कुमार शर्मा, एडीजी इंदौर रेंज

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