4 सालों से सड़ रहा है घोटाले का चावल, अधिकारी फिर निरीक्षण करने आ गए | BALAGHAT NEWS

Saturday, February 10, 2018

आनंद ताम्रकार/ बालाघाट। जिले के कटंगी स्थित भारतीय खादय निगम के गोदामों में पिछले 3-4 वर्षों से भण्डारित लगभग 50 हजार क्विंटल चावल है जिसकी कीमत 12 करोड रूपये बताई गई है। भण्डारित चावल मानव उपयोग के लायक नही रह गया है तथा कीड़े लग चुके है। मामला प्रकाश में आ चुका है। पूर्व में जांच भी हो चुकी है परंतु अब तक कार्रवाई कुछ नहीं हुई। जांच के नाम पर एक बार फिर अधिकारियों का एक दल बालाघाट आ गया। फिर सारी प्रक्रिया शुरू हो गई। समझा जा रहा है कि घोटाले में अपनों को बचाने और दूसरों पर दवाब बनाने के लिए यह सारी प्रक्रिया की जा रही है। प्रमाणित हो चुके मामले में फिर से निरीक्षण शुरू हो गया है। 

भण्डारित चावल का निपटारा किये जाने के उदेश्य से प्रदेश शासन के निर्देष पर 3 सदस्यी जाचं दल ने कटंगी के गोदामों में जाकर भण्डारित चावल का निरीक्षण किया और चावल की मौजूदा स्थिति का आंकलन किया। जांच दल में भारतीय खादय निगम, नागरिक आपूर्ति निगम तथा वेयर हाउस कारपोरेशन के वरिष्ठ अधिकारी शामिल है।

अधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार निरीक्षण दल ने चावल के नमूने लिये हैं तथा ग्रेडेशन कर शासन को अपनी रिपोर्ट सौपेंगे कि भण्डारित चावल का निपटान किस प्रकार किया जाये। यदि भण्डारित चावल मानव उपयोग के काबिल नही रह गया है तो इस संभावना पर विचार किया जायेगा के चावल को किस अन्य रूप में उसको खपाया जा सके।

कस्टम मिलिंग की आड़ में राईस मिलर्स, आपूर्ति निगम, निगम के क्वालिटी इस्पेक्टर तथा अधिकारी की सांठगांठ से खरीदे गये करोडों के चावल की रखरखाव में बरती गई लापरवाही के संबंध में संलिप्त लोगों की जिम्मेदारी भी तय की जायेगी तथा शासन को चावल की खरीदी उसके भण्डारन में करोडों रूपये की क्षति पहुची है इसका भी निर्धारण किया जायेगा।

यह भी पता चला है कि दस्तावेजों में चावल की जितनी मात्रा दर्शाई गई है उतनी मात्रा वास्तविकता में दिखाई नही देती। जांच दल द्वारा इस संबंध में भी चावल की मात्रा का भौतिक सत्यापन कराये जाने की उम्मीद की जा रही है।

यह उल्लेखनीय है कि इस जांच दल द्वारा निरीक्षण किये जाने के पूर्व खादय मंत्री के निर्देश पर एक राज्य स्तरीय जांच दल ने भी भण्डारित चावल की जांच कर अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप चुका है लेकिन आज तक उस रिपोर्ट को सार्वजनिक नही किया गया इससे कयास लगाया जा रहा है की इस गंभीर लापरवाही में संलिप्त लोगों को बचाने का प्रयास तो नही किया जा रहा है।

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