स्कूलों में कोर्स आधा, परीक्षा पास करने के 2 मौके मिलेंगे | EDUCATION NEWS

25 February 2018

नई दिल्ली। बच्चों पर पढ़ाई का तनाव कम हो सके, इसलिए उनका एनसीईआरटी का स्कूल कोर्स आधा किया जाएगा। इससे बच्चों को पढ़ाई के साथ ही खेलकूद का भी समय मिल सकेगा। साथ ही परीक्षा पास करने के भी दो मौके दिए जाएंगे। पहली बार में जो छात्र चूक गए, उन्हें दूसरा मौका मिलेगा। पास हो गए, तो अगली क्लास में जा सकेंगे। ये दोनों सुझाव मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर की ओर से आए हैं। इन दोनों सुझावों पर 2019 के एकेडमिक सेशन से अमल भी शुरू किया जा सकता है। गौरतलब है कि इसी साल नई शिक्षा नीति भी आनी है। ऐसे में संभव है कि ये दोनों बड़े बदलाव भी नई शिक्षा नीति के तहत ही किए जाएं। 

मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा- 'हमारे स्कूलों का सिलेबस ग्रेजुएशन कोर्स के बराबर होता है। बच्चे सिलेबस ही पूरा करते रह जाते हैं। उन्हें किसी और एक्टिविटी जैसे खेल के लिए समय ही नहीं मिल पाता। सिलेबस कम करने से बच्चों को अपना व्यक्तित्व विकसित करने के लिए अलग-अलग एक्टिविटी में भाग लेने का समय मिल सकेगा। परीक्षाओं के तरीके में भी बदलाव की बात पर जावड़ेकर ने कहा कि- 'परीक्षाओं से बच्चों में स्वस्थ्य प्रतिस्पर्धा की भावना आती है। लेकिन जरूरी है कि बच्चों में परीक्षाओं का तनाव ना रहे। 

इसलिए हम दो बार परीक्षाएं कराने पर विचार कर रहे हैं- पहली परीक्षा मार्च में, दूसरी मई में। अगर कोई बच्चा पहली परीक्षा में फेल हो जाता है, तो मई में उसे दूसरी बार परीक्षा देने का मौका मिलेगा। अगर वो इस परीक्षा में पास हो गया तो अगली क्लास में जा सकेगा। जो बच्चा दोनों परीक्षा में पास नहीं हो पाया, उसे ही क्लास में रोका जाएगा।' जावड़ेकर ने बताया कि- शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था में बदलावों को लेकर एक बिल तैयार किया जाएगा और इसे संसद के अगले सत्र में रखा जाएगा। स्कूलों में भी इसे 2019 से लागू कराने की योजना है। 

जावड़ेकर ने बच्चों में बढ़ते तनाव को कम करने के लिए शिक्षकों की भूमिका पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षकों का काम बच्चों की खूबियों-खामियों को परखने का होता है। ऐसा ना हो, तो इसका असर छात्रों के रिजल्ट और उनके सीखने की पूरी प्रक्रिया पर पड़ता है। इसलिए जरूरी है कि शिक्षक अब छात्रों के मेंटर की भूमिका निभाएं। शिक्षकों की ट्रेनिंग भी उसी तरह से होनी चाहिए। जावड़ेकर ने बताया कि 2015 तक देश में 20 लाख शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाना था, लेकिन प्रशिक्षण मिला सिर्फ 5 लाख को। 14 लाख शिक्षकों को अब सरकार की तरफ से स्किल अपग्रेड प्रोग्राम में शामिल किया जा रहा है। 

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