शिवराज सरकार ने छुपा ली भ्रष्ट जिलों की रैंकिंग रिपोर्ट | MP NEWS

Thursday, December 7, 2017

भोपाल। उत्सव के बहाने तलाशने वाली मध्यप्रदेश की शिवराज सिंह चौहान सरकार के हाथ एक बड़ी सफलता लगी है लेकिन फिर भी सरकार परेशान है। सरकार ने मध्यप्रदेश के भ्रष्ट जिलों की रैंकिंग रिपोर्ट तैयार करवाई। भोपाल समेत 16 जिले भ्रष्टाचार से मुक्त पाए गए लेकिन सरकार ने यह रिपोर्ट सार्वजनिक तक नहीं की। जबकि ऐसे मौकों पर मप्र में अक्सर उत्सव मनाए जाते हैं लेकिन इस मामले में सरकार ने गुपचुप पूरी फाइल को भी दबा दिया गया। स्थिति यह है कि अब इस विषय पर दिग्गजों ने चुप्पी साध ली है जबकि प्रशासनिक गलियारों में इस रिपोर्ट को लेकर माहौल गर्म है। 

पत्रकार विकास तिवारी की रिपोर्ट के अनुसार सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से डाटा जमा किया गया था। एसीएस प्रभांशु कमल ने कलेक्टरों ने तीन प्रपत्रों पर हर महीने की 4 तारीख को जानकारी भेजने के लिए कहा था। पहले तो कलेक्टरों ने जानकारी भेजने में ही लापरवाही की। एसीएस प्रभांशु कमल के बार बार रिमांइड कराने के बाद 4 अक्टूबर को पहली बार पूरी जानकारियां जीएडी के हाथ लगीं। इसके आधार पर रिपोर्ट तैयार की गई। लिस्ट में भोपाल एवं छतरपुर सहित 16 ऐसे जिले हैं जिन्हे भ्रष्टाचार से मुक्त माना गया। जबकि भिंड को सबसे ज्यादा भ्रष्ट जिला माना गया। बता दें कि भिंड में सीएम शिवराज सिंह चौहान के पसंदीदा आईएएस इलैया टी राजा कलेक्टर हैं। 

किस तरह किया भ्रष्ट जिलों का निर्धारण
भ्रष्ट जिलों के चयन के लिए लोकायुक्त की कार्रवाईयां, ईओडब्ल्यू प्रकरणों, सीएम हेल्पलाइन में दर्ज हुईं शिकायतों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ चल रहीं विभागीय जांच, नोटिस जैसी कार्यवाहियों के आधार बनाया गया। जिस जिले में सबसे ज्यादा शिकायतें और कार्रवाईयां मिलीं उसे भ्रष्ट जिला माना गया। सरकार के पास जमा हुई जानकारी में भोपाल समेत 16 जिले ऐसे सामने आए जहां एक भी शिकायत या कार्रवाई नहीं हुई। 

कलेक्टरों को क्या परेशानी है
भ्रष्ट जिले तय करने की प्रक्रिया पर कलेक्टरों ने ही सवाल खड़े कर दिए है। उनका कहना है कि जिस जिले में भ्रष्टों पर लोकायुक्त, ईओडब्ल्यू ज्यादा कार्यवाही करे, सीएम हेल्पलाइन में ज्यादा मामले आए, लापरवाहों की विभागीय जांच, नोटिस ज्यादा जारी किए जाए वही जिला सबसे टॉप कैसे घोषित किया जा सकता है। कलेक्टरों का कहना है कि जिन जिलों ने भ्रष्ट और लापरवाहों पर ज्यादा कार्यवाही की उन्हें तो पुरस्कृत किया जाना चाहिए। भ्रष्ट जिले की रैंकिंग प्रक्रिया ही गलत है। 

सरकार ने क्यों लिया यूटर्न
कलेक्टरों द्वारा सवाल खड़े किए जाने के बाद सरकार इस रैंकिंग की सार्वज्निक घोषणा करने से पीछे हट गई है। सरकार का मानना है कि यह प्रक्रिया हर हाल में नुक्सानदायक होगी। 2018 में चुनाव आ रहे हैं। राज्य सरकार ने भ्रष्ट जिलों की रैंकिंग करने का जो फार्मूला तय किया है उसमें हर माह कोई न कोई जिला टाप पर रहना तय है। यदि एक-एक कर अलग-अलग जिले टॉप पर आ गए और सार्वजनिक घोषणा की गई तो उन जिलों की किरकिरी होगी। ऐसे में अफसर नाराज होंगे। सरकार अब कलेक्टरों को नाराज नहीं करना चाहती है। इसलिए भी इसकी घोषणा से सरकार पीछे हट रही है।

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