7500 की ठगी के बदले 2 बहनों से गैंगरेप, माता पिता समेत चारों का मर्डर

Updesh Awasthee
नई दिल्ली। यूपी के इलाहाबाद के नवाबगंज थाना क्षेत्र में 24 अप्रैल को एक ही परिवार के चार सदस्यों की हत्या और गैंगरेप केस का खुलासा हो गया है। पुलिस ने पहले कुछ अन्य लोगों को हिरासत में लिया था लेकिन पता चला कि वो वारदात में शामिल नहीं है। फिर नए सिरे से जांच की ओर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। यह सामूहिक हत्याकांड केवल 7500 रुपए की ठगी के बदले किया गया। पहले दोनों बहनों का गैंगरेप किया गया फिर माता पिता समेत चारों की हत्या कर दी गई। पुलिस ने सामूहिक हत्याकांड के मास्टर माइंड शिक्षक सहित चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। उनके कब्जे से बाइक, चाकू, खून के धब्बे लगे कपड़े बरामद किए हैं।

जानकारी के मुताबिक, जिले के नवाबगंज थाना क्षेत्र के जूड़ापुर गांव में 24 अप्रैल की रात किराना दुकानदार मक्खन लाल साहू (50) उसकी पत्नी मीरा देवी (44) और दो बेटियों वंदना (18 वर्ष) और निशा (16 वर्ष) की हत्या कर दी गई थी। हत्यारों ने हत्या से पहले दोनों बहनो से गैंगरेप भी किया था। इसके बाद लोगों में काफी आक्रोश था और कई प्रदर्शन किए गए थे।

इस मामले में मृतक मक्खन के बेटे रंजीत की तहरीर पर पुलिस ने गांव के ही जवाहर लाल यादव के बेटे शिवबाबू, भल्लू, नरेन्द्र यादव, बांके यादव और नवीन यादव के खिलाफ गैंगरेप, हत्या और पाक्सो एक्ट समेत कई धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराकर पांचों को गिरफ्तार कर लिया था लेकिन जांच में सामने आया कि इनमें से कोई थी हत्या और रेप कांड में शामिल नहीं था।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सुरेश राव ए कुलकर्णी ने बताया कि इस मामले की खुलासे में जुटी नवाबगज पुलिस, क्रांइम ब्रांच, सर्विलांस और स्वाट की सयुंक्त टीम ने चार आरोपियों नीरज पुत्र गुलाबचंद्र, प्रदीप कुमार पुत्र हेमराज, मोहित पुत्र अमरेश कुमार निवासीगण लखनपुर कांदू थाना नवाबगंज और सत्येन्द्र पुत्र राम नरेश निवासी तुलसीपुर थाना सोरांव को गिरफ्तार किया।

पुलिस ने बताया कि इस कांड का मुख्य सूत्रधार नीरज है। उसने वंदना से अपनी बेइज्जती का बदला लेने के लिए इस कांड को अंजाम दिया था। आरोपी नीरज मृतका वंदना के साथ एक कालेज में शिक्षक था। वह उस पर बुरी नजर रखता था। वंदना अपने घर के पास एक निजी कंपनी जन कल्याण ट्रस्ट की एजेंट भी थी, जो कम पैसे के बदले सामान देती थी।

बताया जाता है कि वंदना लोगों से 1250 रुपये जमा करवा कर साइकिल या सिलाई मशीन कम्पनी से दिलवाती थी। नीरज ने अपने 6 रिश्तेदारों से उसके पास 7500 रुपये जमा कराए थे। उसके बदले साइकिल की मांग कर रहा था लेकिन वंदना लगातार नीरज को टरकाती रही। इसके बाद आठ मार्च को दबाव बढ़ने से उसकी कंपनी अपना कार्यालय बंद कर भाग गई।

इसको लेकर नीरज की वंदना से लड़ाई हुई। वंदना से उसे अपमानित करते हुए कंपनी की साइकिल देने पर ही साइकिल दिलाने की बात कही। वंदना द्वारा झिड़कने पर नीरज खुद को अपमानित महसूस करने लगा। 1500 रुपये में वह शिक्षक की नौकरी करता था। 7500 रुपये जाना उसे खल रहा था। इस उसने वदना से अपने अपमान का बदला लेने की ठान ली।

उसने अपने साथियों प्रदीप, मोहित और सत्येन्द्र के साथ साजिश रची। इसके तहत सभी बाइक से जुडापार आए। सीएल कुशवाह सूल में बाइक खड़ी कर दी। वंदना को फोन कर गाड़ी का पट्रोल खत्म होने की बात कहकर उसके घर आ गया। नीरज को जानते हुए वंदना ने दरवाजा खोल दिया। इसके बाद चारों आरोपियों इस वारदात को अंजाम दे दिया, जिसने तहलका मचा दिया।
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