पीसीसी प्रवक्ता ने जारी किया सिंधिया को संकट में डालने वाला बयान | JM SCINDIA

Updesh Awasthee
शैलेन्द्र गुप्ता/भोपाल। कांग्रेस की गुटबाजी से कौन परिचित नहीं है। पार्टी सत्ता में आए या ना आए, लेकिन गुटबाजी कायम रहे, इसका प्रयास हर स्तर पर होता है। मप्र कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता केके मिश्रा ने भी आज कुछ ऐसा ही बयान जारी किया है जो ज्योतिरादित्य सिंधिया के सामने नई परेशानी पैदा कर सकता है। मिश्रा ने सीएम शिवराज सिंह चौहान को चुनौती दी है कि यदि ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कोई अवैधानिक काम किया है तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

क्या कहा था मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने
सीएम शिवराज सिंह ने धार में हुई प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में कहा था कि 'ज्योतिरादित्य जैसे स्वार्थी लोग... मुझे कहते हुए आश्चर्य होता है जो ट्रस्ट लोक कल्याण के लिए होते हैं, उनकी जमीनें ज्योतिरादित्य ने बेच दी। शिवपुरी जैसे जिले में जहां गरीब बसते थे, ऐसी 700 एकड़ जमीन पर कब्जा कर बाउंड्रीवाल बना ली।'

पीसीसी प्रवक्ता ने क्या बयान जारी किया
केके मिश्रा ने कहा कि यदि श्री सिंधिया पर मुख्यमंत्री जी द्वारा लगाये गये आरोपों में दम हैं तो प्रदेश में पिछले 13 वर्षों से काबिज भाजपा सरकार और 11 सालों से स्वयं श्री चौहान कहां सोये हुए थे? विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही श्री सिंधिया पर यह राजनैतिक हमला क्यों ? 

इसमें गलत क्या है
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने बयान में कतई यह नहीं कहा कि ज्योतिरादित्य सिंधिया ने किसी भी प्रकार का असंवैधानिक काम या जमीन पर अवैध कब्जा किया है। उन्होंने एक नैतिक लांछन लगाया है। उनका कहना है कि ट्रस्ट की जिस जमीन का उपयोग शिवपुरी की जनता के हित के लिए किया जाना चाहिए था उस पर बाउंड्रीवॉल बना दी जिससे लोगों को परेशानी हो रही है। शिवराज ने सिंधिया पर आरोप लगाया है कि उन्होंने जनहित की अनदेखी की है। इसमें जांच और कार्रवाई की कोई गुंजाइश ही नहीं है। ट्रस्ट सिंधिया का ही है, लेकिन जनहित के लिए। राजमाता सिंधिया ने जनहित के लिए अपने दरवाजे खोल दिए थे तो ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बाउंड्रीवॉल क्यों बनवा दी। 

मिश्रा ने जिस तरह से चुनौती पेश की है, बेवजह सिंधिया को संकट में डालने वाली है। सरकार पहले से ही कई फाइलें खंगाल रही थी। अब यह प्रक्रिया और तेज हो सकती है। इस चुनौती के कारण सोशल मीडिया पर भी ज्योतिरादित्य सिंधिया को ट्रॉल किया जा सकता है। अटेर के कारण जो मुफीद माहौल सिंधिया के लिए तैयार हुआ था। वो इस एक चुनौती ज्ञापित करने वाली लाइन के कारण बदल सकता है। जबकि इसी बात को शब्द बदलकर भी किया जा सकता था जो सिंधिया को लाभान्वित करती। 

यहां याद रखना होगा कि कमलनाथ हर हाल में चाहते हैं कि वो सीएम कैंडिडेट बनें और दिग्विजय सिंह का गुट नहीं चाहता कि ज्योतिरादित्य सिंधिया को किसी भी तरह का फायदा हो। कहीं ऐसा तो नहीं कि इस तरह एक रणनीति के तहत सिंधिया और शिवराज को भिड़ाने की साजिश रची जा रही हो। राजनीति में अनुमान पर ही आंकलन होता है। वो कुछ भी हो सकता है। 

रोहित सोसायटी घोटाला पर चुप क्यों हो जाती है कांग्रेस
मप्र की राजधानी भोपाल की रोहित गृह निर्माण सहकारी संस्था में कथित 500 करोड़ रूपये के भूखंण्ड घोटाले की शिकायतें और अखबारी खुलासे कांग्रेस अक्सर करती रहती है परंतु कांग्रेसी दिग्गज इस मामले को कभी आगे नहीं बढ़ाते। वो इसे शिवराज सिंह के खिलाफ एक हथियार के रूप में इस्तेमाल करते आ रहे हैं। कांग्रेस ने आज तक इस घोटाले की निष्पक्ष जांच के लिए कोई बड़ा प्रदर्शन नहीं किया। सरकार के झुकने तक कांग्रेस कभी मैदान में डटी नहीं रही। कांग्रेसी नेता सुबह आरोप लगाते हैं और शाम को विषय बदल देते हैं। जबकि यह एक ऐसा मामला है जिसमें यदि कांग्रेस के नेता ईमानदारी के साथ मैदान में आ जाएं तो शिवराज सिंह की कुर्सी हिल सकती है। 
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