प्यार दिल का मामला नहीं, दिमाग का खेल है: रिसर्च रिपोर्ट

Updesh Awasthee
राजीव उपाध्याय/जबलपुर। अब तक यह माना जाता था कि प्यार दिल का मामला है, लेकिन एक रिसर्च रिपोर्ट बताती है कि यह दिमाग का खेल है। दिमाग से निकले हार्मोन्स के कारण दिल धड़कने लगता है और हमें प्यार का अहसास कराता है। हमें लगता है कि प्यार के अहसास के कारण दिल तेज तेज धड़कने लगता है, जबकि साइंटिफिक रूप से यह केवल भ्रम है। जब दिमाग में हार्मोंस एक्टिव होते हैं तभी आपको कोई अच्छा लगता है और प्यार की भावनाएं जागती हैं। 

इस तरह होता है दिमाग में केमिकल लोचा
दिमाग में हाइपोथेलेमस, लिंबिंक सिस्टम होता है। हार्मोन्स पिटिट्यूटरी ग्रंथि में स्टोर रहते हैं। हाइपोथेलेमस से ऑक्सीटोसिन, डोपामाइन, सिरोटिनिन, वेसोप्रेसिनिन उत्सर्जित होता है। ये खून में मिलते हैं तो खून में इनका लेवल बढ़ जाता है। ये दिमाग के कुछ भाग को उत्तेजित करते हैं। खून में इनका लेवल बढ़ने से दिल की धड़कनें तेज हो जाती हैं और दिल धड़कने लगता है।

अलग-अलग हार्मोन्स इस तरह फीलिंग लाते हैं
ब्रेन के हिप्पोसेम्पस, मेडिकल इंसुला, इंटीरिअर सिंगुलेट भाग प्यार की भावनाएं उत्सर्जित करते हैं। डोपामाइन का लेवल बढ़ने पर सिरोटिनिन लेवल कम होता है। यह मूड बनाता है। डोपामाइन के साथ बॉडी में नर्व ग्रोथ फैक्टर रिलीज होता है, जो व्यक्ति में रोमांटिक फीलिंग लाता है। हार्मोन्स ऑक्सीटोसिन एवं वेसोप्रेसिन कनेक्शन, कमिटमेंट की फीलिंग लाते हैं।

प्यार दिल का नहीं, दिमाग का है मामला
प्यार में दिल का कोई रोल नहीं होता, बल्कि जब प्यार किसी से होता है तो दिमाग में हार्मोन्स उत्सर्जित होते हैं। ये खून में मिलते हैं तो खून का प्रवाह दिल में बढ़ जाता है। इससे धड़कनें बढ़ जाती हैं। 
डॉ. आरएस शर्मा, कुलपति, मेडिकल यूनिवर्सिटी व हृदय रोग विशेषज्ञ
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