मप्र: द्वितीय और तृतीय श्रेणी कर्मचारियों को भी देना होगा PROPERTY का ब्यौरा

Updesh Awasthee
भोपाल। अखिल भारतीय और राज्य सेवा के अधिकारियों के बाद अब द्वितीय और तृतीय श्रेणी के कर्मचारियों को भी अपनी चल-अचल संपत्ति का ब्योरा अनिवार्य रूप से देना होगा। सामान्य प्रशासन विभाग ने यह आदेश जारी कर दिए हैं। इन कर्मचारियों से 31 जनवरी तक वर्ष 2016 का ब्योरा मांगा गया है। समय सीमा में ब्योरा नहीं देने पर संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

सरकार ने कर्मचारियों की संपत्ति का ब्योरा जमा करवाने के लिए अनुभाग अधिकारी और सेक्शन हेड की भी जवाबदेही तय कर दी गई है। जानकारी जमा न होने पर ये अधिकारी व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे। प्रदेश में तृतीय श्रेणी के 3.65 लाख नियमित कर्मचारी हैं।

द्वितीय और तृतीय वर्ग के कर्मचारियों से संपत्ति का ब्योरा लेने के नियम तो पहले से हैं लेकिन अब तक मंत्रालय के ही कर्मचारी यह ब्योरा देते आए हैं। सरकार अब सख्ती के साथ इस नियम को लागू करने जा रही है, जिसके चलते जिला, तहसील और ब्लाक स्तर तक के कर्मचारियों से यह जानकारी अनिवार्य रूप से मांगी है। इसके लिए प्रपत्र तैयार किया है, जो विभागों को भेजा जा रहा है।

इन कर्मचारियों को 1 जनवरी से 31 दिसंबर 2016 तक का ब्योरा देना होगा। सामान्य प्रशासन विभाग ने कहा है कि हाल ही में चतुर्थ श्रेणी से पदोन्न्त होकर तृतीय श्रेणी में आए कर्मचारियों को भी यह ब्योरा देना होगा। मंत्रालय के कर्मचारियों को अनुभाग अधिकारी के मार्फत और मंत्रालय के बाहर दफ्तरों में पदस्थ कर्मचारियों को अपने मूल विभाग में यह जानकारी जमा करानी होगी।

आदेश में स्पष्ट किया गया है कि कर्मचारी अपनी संपत्ति का ब्योरा व्यक्तिगत रूप से जमा कराएं। किसी विभाग या सेक्शन में सभी का ब्योरा इकट्टा कर सामूहिक रूप से जमा नहीं कराया जा सकेगा।

एक भी IFS ने नहीं दी जानकारी 
राज्य सरकार IAS, IPS और IFS अफसरों से लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम के तहत 2014 से 2016 तक (तीन साल की) चल-अचल संपत्ति का ब्योरा अप्रैल 2015 से मांग रही है, लेकिन प्रदेश के एक भी आईएफएस अफसर ने ब्योरा नहीं दिया। जबकि 80 फीसदी आईएएस और करीब 45 फीसदी आईपीएस निर्धारित पत्रक में से कुछ जानकारी ऑनलाइन जमा कर चुके हैं। इन अफसरों को सहूलियत देने के लिए केंद्र सरकार ने तीन बार नियमों में बदलाव किया है और करीब 10 बार तारीख बढ़ाई गई है। ऐसे ही राज्य सेवा के 80 फीसदी अफसरों ने भी संपत्ति का ब्योरा नहीं दिया है।

ब्योरा नहीं दिया तो वेतनवृद्धि पर लगेगी रोक 
31 जनवरी तक संपत्ति का ब्योरा जमा नहीं करने वाले कर्मचारियों को सरकार पहले कारण बताओ नोटिस जारी करेगी इसके जवाब से संतुष्ट ना होने पर कर्मचारी की वेतन वृद्धि रोकने और निलंबित करने की कार्रवाई करेगी।
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