नोटबंदी तो ठीक है, 100 खातों में जमा 12 लाख करोड़ कब निकलवाओगे

Manav Tatwal. नोट बंद करने के लिए तीन तर्क दिए जा रहे हैं, पहला अर्थव्यवस्था रेगुलेटेड होगी, दूसरा काला धन बाहर आएगा और काला धन वालों को पकड़ा जायेगा और तीसरा नकली नोट चलन से बाहर किये जाएंगे। अगर यह तीन बातें हो तो इसको पूरा समर्थन है लेकिन 500 और 1000 के नोट बंद करने के फैसले पर कुछ ज़रूरी बात जिनपर विचार होना चाहिए।

1. सौ से कम बड़े कॉर्पोरेट घरानों (ख़रबपतियों) पर बैंक का 12 लाख करोड़ क़र्ज़ है. यह हम सब जानते हैं कि यह पैसा किसी सरकार, मंत्री या बैंक की अपनी सम्पत्ति नहीं है. यह आम जानता की गाढ़ी कमाई का पैसा है, जिसका ब्‍याज एक लाख चौदह हज़ार करोड़ इस साल बजट में माफ़ कर दिया गया. अगर सच में मोदी को आम जनता के हित में काले धन की चिंता है तो क्यों यह व्याज माफ़ किया जा रहा है. क्यों यह क़र्ज़ नहीं वसूला जा रहा है?

2. यह पूरा अभियान विदेशों से काला धन न ला पाने, सबके खाते में 15 लाख का वादा पूरा न कर पाने की नाकामी को छुपाने का प्रयास है. वे जो ब्लैकमनी होल्डर हैं (असली / बड़े वाले ) उनपर कार्यवाई तो दूर आप सुप्रीम कोर्ट तक के पूछने पर उन लोगों के नाम उजागर नहीं करते. यही है आपका साहस ?

3. अब यहाँ विचार कीजिये कि यह खेल आखिर है क्या ? 12 लाख करोड़ बैंक का कॉर्पोरेट्स के पास फंसा है, और उन कॉर्पोरेट्स के हितों की रखवाली मोदी सरकार द्वारा उसका ब्‍याज भी माफ़ कर दिया जा रहा है. अब पूँजी के इस बढ़ते संकट से निपटने के लिए बहुत ज़रूरी है कि किसान ,मजदूर, खोमचे वाले, पटरी दुकानदार, तीसरी चौथी श्रेणी का कर्मचारी, आम महिलाएं और मध्यम वर्ग के पास रखे पैसे को बैंक में एक झटके में जमा कराया जाये. जिससे बैंक के पास फिर से पूँजी एकत्र हो और सरकार फिर कॉर्पोरेट्स को कर्ज दिलवा सके.

4. सबसे ख़राब स्थिति यह है कि करीब पाँच करोड़ लोग खुद और परिवार की बेहद ज़रूरी ज़रूरतों (दवा, सब्ज़ी, आटा, चाय, दूसरी खुदरा चीज़ों) के लिये बेवजह सताये गये हैं. वे भोर से बैंकों, पोस्ट आफिसों की लाइनों में खड़े रहे. अपने ही कमरतोड़ मेहनत से कमाए अपने पैसे को अपने ऊपर खर्च करने के लिए भीख की तरह लेने के लिए ! इनमें से शायद ही कोई वो हो जिसको पकड़ने के लिये ये नोटबंदी की स्कीम लाई गई है. कितने मजदूर, पटरी दुकानदारों के यहाँ चूल्हा तक नहीं जला उसकी ज़िम्मेदारी कौन लेगा ?

5. नोटबंदी के लिए ज़ारी किये गए तुगलकी सरकारी आदेश में यह भी शर्त लगायी है कि अगर किसी के खाते में आज से लेकर 30 दिसम्बर तक 2.5 लाख से ज्यादा पैसा जमा हुआ तो वोह जांच के घेरे में आएगा और उस पर दो सौ परसेंट पेनालिटी लगायी जाएगी. अच्छा मजाक है मेहनत से, इमानदारी से सचाई से अगर पैसा कमाया है और उसमे से अपना पेट काटकर (जो प्राय: आम किसान और मजदूर परिवारों और निम्न मध्य वर्ग में होता रहा है) पाँच सात, १० लाख जोड़ ले, या पत्नियों द्वारा सालों साल पतियों से मिलने वाले घर खर्च में से बचा कर जो पूँजी आज एकत्र की हो वह काला धन हो जाएगी ? सबको पता है काला धन कोई नकद में नहीं रखता होगा.

ऊपर लिखी सारी मुसीबत अगर आम जानता झेल भी लेती है तब भी सवाल वही रहेगा कि, क्यों ? और किसलिए ? इससे आम जनता को क्या मिलेगा ? महगाई कम होगी ? आमदनी बढ़ेगी ? खाते में 15 लाख आएगा ? शिक्षा , खेती , चिकित्‍सा में सब्सिडी मिलेगी या मुफ्त हो जायेगा ? या आम जनता को भूखा मार कर, परेशान करके बड़े कॉर्पोरेट घरानों के हितों की रक्षा की जाएगी ?
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