अब भी घाटे में हैं दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी, गणना पत्रक भी जारी नहीं हुआ

Updesh Awasthee
भोपाल। सुप्रीम कोर्ट तक लंबी कानूनी लड़ाई लड़ने के बावजूद दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को कहने के लिए तो नियमित वेतनमान मिल गया लेकिन ये उनके लिए घाटे का ही सौदा रहा। लगभग 15 हजार दैवेभो को ग्रेच्युटी राशि में 40 हजार से ज्यादा का नुक्सान होगा। गणना पत्रक अभी तक जारी नहीं हुआ है अत: नवम्बर में भी पुराना वेतन ही मिलेगा। 

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक दैवेभो कर्मचारियों को नियमित किया जाना था, लेकिन राज्य सरकार ने चालबाजी कर ली। उन्हें स्थाई कर्मचारी ना बनाकर स्थाई कर्मी मान लिया गया और नियमित वेतनमान दे दिया है। अब कर्मचारियों का आरोप है कि सरकार नियमित वेतनमान दे रही है, तो वह नियमित कर्मचारियों जैसा ही होना था। जबकि सरकार ने चतुर्थ संवर्ग का काम कर रहे दैवेभो को 4440 के स्थान पर 4000 और तृतीय संवर्ग के दैवेभो को 5200 के स्थान पर 5000 पे-बैंड दिया है। ऐसा करके सरकार ने चतुर्थ संवर्ग के वेतन में 440 और तृतीय संवर्ग के वेतन में 200 रुपए की कटौती कर दी है। इसका नुकसान कर्मचारियों को हमेशा उठाना पड़ेगा। दैवेभो नेताओं का कहना है कि ग्रेच्युटी की राशि फिक्स होने से कर्मचारियों को खासा नुकसान हुआ।

सरकार ने चतुर्थ संवर्ग के लिए 1.25 लाख ग्रेच्युटी फिक्स की है, जबकि तृतीय संवर्ग में दो श्रेणी बना दी है, जो कर्मचारी 20 साल की सेवा पूरी करके रिटायर होंगे, उन्हें 1.50 लाख और 33 से 36 साल की सेवा के बाद रिटायर होने वालों को 1.75 लाख ग्रेच्युटी दी जाएगी। कर्मचारी नेताओं को दावा है कि इससे चतुर्थ संवर्ग के कर्मचारियों को 40 हजार रुपए का नुकसान हो रहा है। वे बताते हैं कि 33 साल की क्वालीफाइंग सर्विस मानी जाती है।

इस हिसाब से तकरीबन 1.65 लाख ग्रेच्युटी मिलना चाहिए, लेकिन नए निर्णय के मुताबिक 1.25 लाख मिलेगी। कर्मचारियों का कहना है कि सरकार वर्ष 2005 के पहले से स्थाई कर्मी मान लेती, तो इन कर्मचारियों को पेंशन का भी लाभ मिल जाता, लेकिन अब ऐसा नहीं है। क्योंकि वर्ष 2006 में पेंशन बंद कर दी गई है और 7 साल से कम सेवा होने के कारण ये कर्मचारी पेंशन नियम 1966 के दायरे से बाहर हो गए हैं।

वेतन गणना पत्रक जारी नहीं
सरकार ने दैवेभो कर्मचारियों को एक सितंबर से नए वेतनमान का लाभ दिया है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अक्टूबर के वेतन से नगद लाभ मिलने का भरोसा दिलाया था, लेकिन इन कर्मचारियों को नवंबर में भी नया वेतन मिलना मुश्किल है। दरअसल, सामान्य प्रशासन विभाग ने अब तक गणना पत्रक जारी नहीं किया है। वेतन की गणना का फार्मूला जारी नहीं करने से किसी भी कार्यालय में नए वेतनमान के हिसाब से वेतन नहीं बना है।

इतना ही नहीं, अफसर स्थाई कर्मी के आदेश भी देने को तैयार नहीं हैं। वेतन निर्धारण में सर्विस बुक भी समस्या बन गई है। क्योंकि कई विभागों में कर्मचारियों का सर्विस रिकॉर्ड ही नहीं है। जबकि सरकार तीन साल पहले सर्विस बुक बनाने के निर्देश दे चुकी है।

इनका कहना है
विभागों में पदस्थ अफसर दैवेभो को लाभ नहीं देना चाहते। इसलिए नया वेतनमान देने में देरी कर रहे हैं। वेतनमान में विसंगतियां भी सामने आ रही हैं। शासन ने भी गणना पत्रक जारी नहीं किया है। सरकार को ग्रेच्युटी पर पुनर्विचार करना चाहिए और कर्मचारियों को छठवां वेतनमान भी जल्द देना चाहिए।
अशोक पांडेय, 
अध्यक्ष, मप्र कर्मचारी मंच
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