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क्या शिवराज सरकार मोहन भागवत के विचार को साकार करेगी ?

जावेद खान। अभी हाल ही में आदरणीय मोहन भागवत जी का बयान सुर्खियों में है। उनके मुताबिक जनसंख्या नियंत्रण के नियम सभी के लिए समान होने चाहिए। साथ ही उन्होने समस्त हिन्दु समाज से आह्वान करते हुए कहा है कि 'ज्यादा बच्चे पैदा करने से हिंदुओं को किसने रोका है'। मैं विनम्रतापूर्वक बताना चाहता हें कि 'ज्यादा बच्चे पैदा करने से हिंदुओं को आपकी शिवराज सरकार ने रोका है।'

मै सीधे अपने पाईन्ट पर आना चाहता हूूॅॅ कि इसे यदि आरएसएस हिन्दुओं को दिये गए निर्देश के रूप में लेती है तो उन्हे प्रदेश में भाजपा सरकार के ​इस विषयक ​नीति निर्धारण में भी अपना हस्तक्षेप रखना चाहिए। पंचायत राज अधिनियम 1993 की धारा 16 के तहत सरकार ने यह तय किया कि कोई भी ऐसा व्यक्ति जिसकी दो से ​अधिक ​जीवीत संतान हो और उनमें से किसी एक का जन्म 26 जनवरी 2001 के बाद हुआ हो तो वह व्यक्ति कदाचरण की श्रेणी में माना जाकर संवैधानिक मुलभूत अधिकारों से वंचित कर दिया जाएगा। जैसे व्यक्ति का चुनाव न लड़ पाना , प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में न बैठ पाना, पदोन्नति रोक दिया जाना इत्यादि।

अब राजनीतिक लाभ लिये जाने के कारण चुनाव लड़ने वाले जन प्रतिनिधियों को इस नियम में शिथिलता प्रदान करते हुए उन्हे छूट दे दी गई कि वे बच्चे अधिक भी पैदा करें तो अयोग्य घोषित नही किये जा सकेंगे लेकिन बड़ा सवाल यह है कि फिर इसी नियम की शिथिलता कर्मचारियों के लिए प्रभावशिल क्यों नही है ?

मै आपको स्पष्ट कर दूूॅू कि यदि मुस्लिम वर्ग की बात करे तो वह दो प्रति​शत के लगभग ही शासकीय सेवाओं से संबद्व होंगे लेकिन 95 प्रतिशत से अधिक हिन्दु कर्मचारी इस नियम के चलते न बच्चे पैदा कर पा रहे है और न ही प्रगति कर पा रहे है।

हालाकि तीसरी संतान पर विचार माता पिता बहुत विषम परिस्थिती में ही करते है लेकिन एसे में हिन्दु वर्ग की जनसंख्या बढ़ाने का जो आह्वान है वह बेहद सुशिक्षित वर्ग के लिए किसी काम का नही रह जाता। यहां से बेहतर शिक्षित संतान उच्च विचारक नागरिक के रूप में जाने जा सकते है। अब इस आवहान और संघ विचारधारा के बीच में प्रदेश की संघ विचारधारा की सरकार भी है। देखने वाली बात यह भी होगी कि यह सरकार अपने परम श्रद्वेय पुरोधा श्री मोहन भागवत जी के आवहान को कितनी गंभीरता से लेती है ? 

यदि भागवत जी की मंशा या यूं कहे कि संघ की मंशा अनुरूप हिन्दु जनसंख्या का घनत्व बढ़ाना ही है तो आप प्रदेश के कर्मचारियों की प्रगति में आड़े आ रहे इस नियम को या तो समाप्त करें या जन प्रतिनिधियों की भॉति शिथिलता प्रदान करें ताकि आह्वान पर अमल किया जा सके। धन्यवाद।
(लेखक आजाद अध्यापक संघ के महासचिव हैं। )