भारतीय मुद्रा का नाम रुपया ही क्यों पड़ा, पढ़िए रोचक कहानी

Updesh Awasthee
दुनिया भर में मुद्राओं के अलग अलग नाम हैं। अमेरिका में डॉलर, इंग्लेंड में पॉंड, अरब में दीनार तो ऐसे कई सारे नाम हैं। भारत में मुद्रा को रुपया कहा जाता है। बहुत पहले भारत में मुद्रा को अलग अलग नामों से पुकारा जाता था। कहीं 'मुहर' कहीं 'दाम', कहीं 'टका' तो कहीं 'आना'। हर क्षेत्र में मुद्रा की अलग पहचान थी। बाद में वो रुपया बन गई। मजेदार तो यह है कि रुपया के रूप भी बदलते रहे परंतु उसका नाम आज तक नहीं बदला। 

क्या अर्थ है इस शब्द का 
रुपया शब्द का उद्गम संस्कृत के शब्द रुप् या रुप्याह् में निहित है, जिसका अर्थ होता है चाँदी और रूप्यकम् का अर्थ चाँदी का सिक्का है। इसीलिए भारत की वर्तमान में प्रचलित मुद्रा में चांदी का धागा डाला जाता है। रुपया 100 का हो या 1000 का उसमें धागा चांदी का ही होता है। कभी सोने का नहीं होता। 

सबसे पहले किसने प्रयोग किया 
रुपया शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम शेर शाह सूरी ने भारत मे अपने शासन 1540-1545 के दौरान किया था। शेर शाह सूरी ने अपने शासन काल में जो रुपया चलाया वह एक चाँदी का सिक्का था जिसका भार 178 ग्रेन (11.534 ग्राम) के लगभग था। उसने तांबे का सिक्का जिसे दाम तथा सोने का सिक्का जिसे मोहर कहा जाता था, को भी चलाया। कालांतर में मुगल शासन के दौरान पूरे उपमहाद्वीप में मौद्रिक प्रणाली को सुदृढ़ करने के लिए तीनों धातुओं के सिक्कों का मानकीकरण किया गया।

शेर शाह सूरी के शासनकाल के दौरान आरम्भ किया गया 'रुपया' आज तक प्रचलन में है। भारत में ब्रिटिश राज के दौरान भी यह प्रचलन में रहा, इस दौरान इसका भार 11.66 ग्राम था और इसके भार का 91.7 प्रतिशत तक शुद्ध चाँदी थी। 19वीं शताब्दी के अंत में रुपया प्रथागत ब्रिटिश मुद्रा विनिमय दर, के अनुसार एक शिलिंग और चार पेंस के बराबर था वहीं यह एक पाउण्ड स्टर्लिंग का 1/15 भाग था।

19वीं सदी में जब दुनिया में सबसे सशक्त अर्थव्यवस्थाएं स्वर्ण मानक पर आधारित थीं तब चाँदी से बने रुपये के मूल्य में भीषण गिरावट आई। संयुक्त राज्य अमेरिका और विभिन्न यूरोपीय उपनिवेशों में विशाल मात्रा में चाँदी के स्त्रोत मिलने के परिणामस्वरूप चाँदी का मूल्य सोने के अपेक्षा बहुत गिर गया। अचानक भारत की मानक मुद्रा से अब बाहर की दुनिया से अधिक खरीद नहीं की जा सकती थी। इस घटना को 'रुपये की गिरावट' के रूप में जाना जाता है।

पहले रुपया (11.66 ग्राम) 16 आने या 64 पैसे या 192 पाई में बाँटा जाता था। रुपये का दशमलवीकरण 1957 में भारत मे, 1869 में सीलोन (श्रीलंका) में और 1961 में पाकिस्तान में हुआ। इस प्रकार भारतीय रुपया 100 पैसे में विभाजित हो गया। भारत में पैसे को पहले नया पैसा नाम से जाना जाता था। 

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