कौन बाबा साहब, डोंट टॉक नान्सेंस: जुलानिया ने थेटे से कहा था

Updesh Awasthee
भोपाल। आत्महत्या की धमकी दे चुके आईएएस रमेश थेटे ने कारण बताओ नोटिस का जवाब देने के बजाए सीएम शिवराज सिंह चौहान को एक और चिट्ठी लिखी है। अपनी इस चिट्टी में थेटे ने उस 'टंटे की जड़' का खुलासा किया है जिसके कारण यह स्थिति निर्मित हो गई। उन्होंने सीएम को लिखा है कि मैं इस चिट्ठी के माध्यम से आप को विवाद की असली जड़ बताना चाह रहा हूं और ये जानकर आपकी आंखे खुल जाएंगी। 

आईएएस रमेश थेटे ने अपनी चिट्ठी में लिखा है कि 13 जून 2016 को विकास आयुक्त कार्यालय का कार्य विभाजन आदेश जारी होने के बाद में एसीएस राधेश्याम जुलानिया से मिला और इसी दिन पहली बार में मेरा जुलानिया से वाद विवाद हुआ। रमेश थेटे ने लिखा है कि मैंने जुलानिया से कहा कि मैं यह अन्याय बर्दाश्त नहीं करूंगा। मैं बाबा साहब की औलाद हूं, इस पर जुलानिया भड़क गए और कहने लगे कौन बाबा साहब, डोंट टॉक नान्सेंस। काम की बात करो। 

थेटे का कहना है कि उनके ये शब्द सुनकर में मेरा दिमाग खराब हो गया है और तब मेरे मन में बातचीत रिकॉर्ड करने का ख्याल नहीं आया था। मैं पूछता रहा कि अगर मैंने ये सब रिकॉर्ड कर लिया होता तो जुलानिया को उसी दिन हथकड़ी लगाकर जेल की हवा खिला दी होती और दुनिया की कोई ताकत उन्हें रोक नहीं सकती लेकिन रिकॉर्डिंग और सबूत न होने के कारण मैं चुप रहा। 

आईएएस रमेश थेटे ने आगे लिखा है कि 13 जून के विवाद के बाद जुलानिया मुझसे अकड़कर बात करने लगे। मैंने पंचायत मंत्री का अनुमोदन प्राप्त कर मंत्रालय के कार्य विभाजन का आदेश जारी करने का प्रारूप प्राप्त कर लिया। मैं 6 जुलाई को जुलानिया की अनुमति लेकर उनके कमरे पर पहुंचा और बातचीत करने लगा। 

जुलानिया मुझसे नाराज थे और इस बीच कुछ लोगों के आ जाने के कारण मेरी बातचीत नहीं हो सकी। लोगों के जाने के बाद मैंने बातचीत शुरू की और इससे पहले मैं बाबा साहब की बात करता जुलानिया ने मुझे कमरे बाहर जाने के लिए कह दिया और दोबारा न आने का आदेश दिया। मैंने 6 जुलाई को रिकॉर्डिंग की थी, जिसे मैंने आपको प्रेषित किया है। 

अपनी चिट्ठी में रमेश थेटे ने सीएम से जबाब मांगा है कि आप अब भी जुलानिया को संरक्षण प्रदान करेंगे। थेटे ने सीएम से कहा है कि आप मुख्यमंत्री इसलिए बने क्योंकि हम लोगों ने आपको वोट दिया है। उन्होंने लिखा है कि हम बाबा साहब पर मर मिटने वाले लोग हैं। हमारे लिए नौकरी और पद मायने नहीं रखता, जब बाबा साहब के सम्मान की बात आ जाती है। 

थेटे ने आगे लिखा है कि जुलानिया दलित विरोधी है ये तो मुझे मालूम था, लेकिन उसके मन में दलितों के प्रति इतनी नफरत और बाबा साहब के प्रति इतना असम्मान है, मैंने पहली बार अनुभव किया। थेटे ने कहा है कि आपने कहा था कि बाबा साहब नहीं होते तो मैं मुख्यमंत्री नहीं बनता। जुलानिया के कारण आज आपकी छवि दलित विरोधी हो गयी है और समूचे प्रदेश में आपके प्रति दलितों में आक्रोश है। अभी भी समय है आप जाग जाइए और जुलानिया को सबक सिखाइए। अंबेडकर वादियों में सकारात्मक संदेश जाएगा। 

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