25 वर्षों में पार्टी का 'नाश' हो गया: उद्धव ठाकरे

Updesh Awasthee
मुंबई। शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भाजपा और शिवसेना गठबंधन पर बड़ा बयान दिया है। उद्धव ने कहा कि साथ 25 वर्षों के गठबंधन के दौरान पार्टी का 'नाश' हो गया। दोनों पार्टियों का गठबंधन साल 2014 में महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले टूट गया था। बाद में शिवसेना सरकार में शामिल हुई। उन्होंने कहा जैसे ही उनकी पार्टी को लगेगा कि उसका ‘‘असम्मान’’ किया जा रहा है, वह सरकार से निकल जाएगी।

उद्धव ने कहा कि वह भाजपा को कभी भी ब्लैकमेल नहीं करेंगे, कभी उसकी पीठ में छुरा नहीं भोकेंगे। यह पूछे जाने पर वर्तमान सरकार अपनी सहयोगी शिवसेना को क्यों ‘‘नजरअंदाज’’ कर रही है, उन्होंने कहा कि ऐसे तत्व हैं जो अनिश्चितता का माहौल बनाना चाहते हैं। ठाकरे ने बिहार, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और केरल के विधानसभा चुनावों में उन राज्यों को ‘‘कांग्रेस मुक्त’’ बनाने में नाकाम रहने के लिए भी भाजपा पर कटाक्ष किया।

इस गठबंधन ने शिवसेना का नाश किया: ठाकरे
उद्धव ठाकरे ने कहा, "25 वर्षो या कम से कम दो पीढ़ियों तक हम एक दूसरे को पकड़े रहे और आगे बढ़ते रहे। हम अपने दम पर काफी पहले सत्ता में आ सकते थे, लेकिन भाजपा के साथ इस गठबंधन से हमारा नाश हुआ।" उन्होंने कहा कि उस समय गठबंधन मजबूरी रही होगी, 'लेकिन शिवसेना अगर अकेले चली होती तो आज तस्वीर बिल्कुल अलग होती।'

संजय राउत ने लिया साक्षात्कार
शिवसेना के मुख पत्र सामना (मराठी) और दोपहर का सामना (हिन्दी) में मंगलवार को उद्धव ठाकरे के 56वें जन्मदिन से पहले छपे उनके साक्षात्कार में उन्होंने कार्यकारी संपादक और सांसद संजय राउत से यह बात कही। उद्धव ठाकरे का जन्मदिन बुधवार को है।

25 साल के गठबंधन में नुकसान
उन्होंने कहा कि एक समय था जब राज्य के सभी बड़े नेता और लोग तत्कालीन शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे के साथ थे, लेकिन दुर्भाग्यवश 25 वर्षो के गठबंधन में हमें बेहद नुकसान हुआ। उन्होंने कहा कि यह विचारधाराओं का एक गठबंधन था और बाल ठाकरे ने अल्पकालीन लाभ को देखे बिना, ईमानदार राष्ट्रवादी सोच के तहत गठबंधन किया था।

पहले गठबंधन टूटता तो स्थिति कुछ और होती
उद्धव ने कहा, "बाल ठाकरे कभी सत्ता के भूखे नहीं रहे। वह केवल हिन्दू वोट को बंटने से रोकने को लेकर चिंतित थे। लेकिन, बाद में भाजपा ने गठबंधन तोड़ दिया।" उन्होंने कहा कि भाजपा ने 2014 में जब हमसे अपना 25 वर्षों का गठबंधन तोड़ लिया, तो शिवसेना ने विधानसभा चुनाव अकेले लड़ा। लेकिन, तैयारी के लिए सिर्फ दो सप्ताह मिले थे, अन्यथा स्थिति भिन्न होती।

अगले चुनाव में शिवसेना उतारेगी सीएम उम्मीदवार
ठाकरे ने कहा कि गठबंधन का निरंतर अस्तित्व दोनों पार्टियों पर निर्भर करता है। लेकिन, भाजपा अपने दम की बात कर रही है तो शिवसेना भी पीछे नहीं रहेगी और अगले महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में अपना मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार पेश करेगी।

देवेंद्र फडणवीस की तारीफ की
हालांकि ठाकरे ने भाजपा के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की तारीफ की और उनसे अच्छे संबंध होने की दुहाई दी। लेकिन, उन्होंने कहा कि जिस दिन यह महसूस होगा कि शिवसेना के साथ अच्छा व्यवहार नहीं हो रहा है तो वह सरकार से अलग हो जाएंगे। ठाकरे ने कहा कि शिवसेना भयादोहन और राज्य सरकार को अस्थिर करने का सहारा नहीं लेगी।

अपने दम पर लड़ लेंगे निकाय चुनाव: ठाकरे
मुंबई नगर निगम चुनाव की चर्चा करते हुए शिवसेना प्रमुख ने कहा कि दोनों दलों ने मिलकर चुनाव लड़ने के लिए वार्ता शुरू की है। अगर भाजपा गठबंधन तोड़ना चाहती है तो इस बार शिवसेना अपने दम पर निकाय चुनाव लड़ने को पूरी तरह तैयार है।

हिंदुत्व था गठबंधन का आधार: ठाकरे
शिवसेना प्रमुख ने कहा, ‘‘उन दिनों हमारे गठबंधन का आधार हिन्दुत्व था लेकिन इस समय हमें अपने गठबंधन के आधार पर काम करना होगा। बाकी मैं मुख्यमंत्री के संपर्क में हूं जोकि नए हैं लेकिन मैं उनकी प्रतिबद्धता पर करीब से नजर बनाए रखा है और मैं उन्हें भविष्य में अच्छे काम के लिए शुभकामनाएं देता हूं।’’ 

यह पूछे जाने पर कि उनकी पार्टी क्यों सरकार में शामिल होने के बावजूद उसपर आरोप लगाती है, ठाकरे ने कहा, ‘‘इस वजह से हीं मैं हमारे गठबंधन के मूल सिद्धांतों पर काम करने और उन्हें एक बार फिर स्पष्ट करने पर जोर देता हूं। शिवसेना ने कभी भी बेबुनियाद और बेकार के आरोप नहीं लगाए हैं और ना हीं कभी व्यक्तिगत टिप्पणी की है।’’

लालू और जयललिता का किया जिक्र
उन्होंने कहा, ‘‘लालू प्रसाद के चुनाव लड़ने पर रोक लगी हुई है लेकिन उनकी पार्टी बिहार में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। ऐसा ही तमिलनाडु में जयललिता के साथ हुआ। ठाकरे ने कहा, ‘‘मैं इन दोनों का नाम इसलिए ले रहा हूं क्योंकि वे भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर जेल गए और वहां से निकले, तब भी उन राज्यों के लोगों ने उन्हें चुना और भारी बहुमत देकर विजयी बनाया।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ये चुनाव उन लोगों के लिए झटका है जो अपनी स्वच्छ छवि का ढिंढोरा पीटते हैं। बिहार, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और केरल के लोगों ने क्यों आपको (भाजपा की तरफ साफ इशारा) खारिज कर दिया और उन्हें चुना।’’ शिवसेना प्रमुख ने कहा, ‘‘क्योंकि इन राज्यों के लोगों ने आपके बड़े-बड़े वादों, रैलियों में बड़े-बड़े संबोधनों पर ध्यान नहीं दिया। उन्होंने पूरी तरफ फैसला कर लिया कि वे ही उनके नेता हैं।’’ 
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